बीजापुर , नवंबर 13 -- छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के घने नेशनल पार्क क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने एक निर्णायक और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। बीजापुर की डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी), डीआरजी दंतेवाड़ा और विशेष टास्क फोर्स (एसटीएफ) की संयुक्त टीमों ने कांदुलनार-कचलारम के जंगलों में हुई भीषण मुठभेड़ में दक्षिण बस्तर के लिए खतरा माने जाने वाले छह कुख्यात माओवादियों को मार गिराया है। इन सभी पर कुल 27 लाख रुपये का इनाम रखा गया था और इनकी मौत से माओवादी संगठन के सैन्य, राजनीतिक और सप्लाई नेटवर्क की कमर टूट गयी है।

बस्तर पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) पी सुंदरराज, पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) दंतेवाड़ा और पुलिस अधीक्षक बीजापुर ने एक संयुक्त प्रेस वार्ता में गुरुवार को बताया कि यह सफल अभियान विश्वसनीय आसूचना पर शुरू किया गया था, जिसमें डीकेएसजेडसीएम पापाराव की मद्देड़ एरिया कमेटी के प्रभारी डीवीसीएम कन्ना उर्फ बुचन्ना और पामेड़ एरिया कमेटी की सचिव डीवीसीएम उर्मिला सहित 50-60 माओवादियों की उपस्थिति की जानकारी मिली थी। गत 11 नवंबर की सुबह से शुरू हुए इस ऑपरेशन के दौरान रुक-रुक कर गोलीबारी का दौर चला, जिसके बाद मुठभेड़ स्थल से छह शव मिले जिन्हें बीजापुर लाया गया और मुठभेड़ स्थल से भारी मात्रा में हथियार बरामद किए गए।

मारे गए नक्सलियों में सबसे महत्वपूर्ण नाम डीवीसीएम कन्ना उर्फ बुचन्ना (35) का है, जिस पर आठ लाख रुपये का इनाम रखा गया था। बीजापुर पुलिस के अनुसार, बुच्ना पर जिले की विभिन्न थानों में 42 आपराधिक मामले दर्ज थे और उसके खिलाफ 18 स्थायी वारंट जारी थे।

पुलिस अधीक्षक बीजापुर डॉक्टर जितेंद्र कुमार यादव ने बताया, "कन्ना उर्फ बुचन्ना पिछले एक दशक से अधिक समय से इस क्षेत्र में माओवादी हिंसा का एक प्रमुख चेहरा था। वह कैम्प हमलों, आईईडी विस्फोटों, ग्रामीणों की हत्या, डकैतियों और संचार टावरों को नष्ट करने जैसी सैकड़ों वारदातों का मास्टरमाइंड था। उसकी मौत से इस क्षेत्र में आतंक का एक लंबा अध्याय समाप्त हुआ है।"दूसरी प्रमुख कैडर डीवीसीएम उर्मिला थीं, जो कुख्यात शीर्ष माओवादी नेता डीकेएसजेडसीएम पापाराव की पत्नी और पामेड़ एरिया कमेटी की सचिव थीं। उन पर भी आठ लाख रुपये का इनाम था। उर्मिला न केवल हिंसक घटनाओं में शामिल थीं, बल्कि संगठन के राजनीतिक विंग और पीएलजीए बटालियनों की रसद आपूर्ति (सप्लाई चेन) की प्रमुख जिम्मेदार भी थीं।

अन्य मारे गए माओवादियों में एसीएम जगत तामो उर्फ मोटू ( पांच लाख रुपये का इनाम), और तीन पार्टी सदस्य - देवे, भगत और मंगली ओयाम (प्रत्येक पर दो-दो लाख रुपये का इनाम) शामिल हैं।

मुठभेड़ स्थल से सुरक्षा बलों ने हथियारों का एक बड़ा जखीरा बरामद किया है। इसमें दो इंसास राइफलें, एक 9 एमएम कार्बाइन, एक .303 राइफल, एक सिंगल शॉट राइफल, एक 12 बोर बंदूक, इनके मैगजीन और सैकड़ों कारतूस शामिल हैं। इसके अलावा, रेडियो सेट, स्कैनर, मल्टीमीटर, हथगोले, सुरक्षा फ्यूज, माओवादी साहित्य, वर्दी और चिकित्सा सामग्री भी जब्त की गई है। बरामद डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों से बुचन्ना के अर्बन नेटवर्क से संबंध के सुराग मिले हैं, जिसकी जांच अब पुलिस की विशेष टीम कर रही है।

यह घटना बस्तर संभाग में चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों की बढ़ती गति और प्रभावशीलता को रेखांकित करती है। पुलिस अधीक्षक बीजापुर के अनुसार, केवल वर्ष 2025 में ही जिले में अब तक 144 माओवादी मारे गए हैं, 499 गिरफ्तार किए गए हैं और 560 ने आत्मसमर्पण किया है। जनवरी 2024 से अब तक के आंकड़े और भी चौंकाने वाले हैं जिसमें 202 मारे गए, 1002 गिरफ्तार और 749 ने आत्मसमर्पण किया है।

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