सरगुजा , मार्च 16 -- छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल क्षेत्र सरगुजा में आज से शुरु हुयी पांचवी कक्षा की परीक्षा में परीक्षार्थी छात्रों की संख्या बेहद कम रहने से शिक्षकों के बीच हड़कंप मच गया।
कक्षा 5वीं की केंद्रीकृत वार्षिक परीक्षा के पहले दिन 16 मार्च को सैकड़ों बच्चे परीक्षा केंद्र न पहुंचकर महुआ बीनने के लिए जंगलों की ओर रवाना हो गए। ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह नौ बजे तक अधिकांश स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बेहद कम रही।
परीक्षा कार्य में तैनात शिक्षकों से मिली जानकारी के अनुसार आज गणित विषय की परीक्षा प्रस्तावित थी। परीक्षा केंद्रों पर जब बच्चे नहीं पहुंचे तो शिक्षकों को उन्हें ढूंढने के लिए गांवों का रुख करना पड़ा। कई शिक्षकों ने बताया कि वर्तमान में महुआ बीनने का सीजन चल रहा है और आदिवासी बहुल इलाकों में परिवार के साथ बच्चे भी महुआ इकट्ठा करने के लिए जंगलों में चले गए हैं, जिसके चलते वे परीक्षा में शामिल नहीं हो सके।
स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए शिक्षकों को बच्चों को खोजकर परीक्षा केंद्र तक लाने के निर्देश दिए थे। क्षेत्र के एक सहायक शिक्षक संजय कुमार मानिकपुरी ने बताया कि आदिवासी समाज के लिए महुआ आजीविका से जुड़ा मामला है, जिसके कारण बच्चों का परीक्षा से दूर रहना एक चुनौती है।
शिक्षकों ने यह भी आश्वासन दिया है कि जो बच्चे महुआ बीनने के कारण परीक्षा नहीं दे पाए हैं, उन्हें बाद में विशेष प्रबंध कर परीक्षा दिलाई जाएगी ताकि उनका शैक्षणिक नुकसान न हो।
उल्लेखनीय है कि कक्षा 5वीं की यह केंद्रीकृत वार्षिक परीक्षा 16 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक चलेगी। विभिन्न माध्यमों के स्कूलों के लिए अलग-अलग तिथियों पर गणित, अंग्रेजी, हिंदी, पर्यावरण और उर्दू विषयों की परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं।
गौरतलब है कि सी.जी.बोर्ड, सी.बी.एस.ई. पाठ्यक्रम, मदरसा बोर्ड और संस्कृत विद्या मण्डलम से जुड़े स्कूलों के लिए यह परीक्षा सुबह नौ बजे से 11 बजे तक आयोजित की जा रही है।
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