रायपुर , नवंबर 16 -- छत्तीसगढ़ में इस सप्ताह सर्दी ने अपने तीखे तेवर दिखा दिए हैं। मौसम विभाग के अनुसार राज्य के उत्तरी और मध्य हिस्सों में अगले तीन दिनों तक शीतलहर की स्थिति बनी रह सकती है। इसके बाद तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है।

नवंबर के मध्य में बढ़ती ठंड के बीच सुकमा और दंतेवाड़ा जिलों में स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया संक्रमण की आशंका पर सतर्कता बरतने की सलाह दी है। बदलते तापमान और मौसम की अनियमितता को इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है।

ठंड का असर उत्तर भारत से आने वाली ठंडी हवाओं के कारण अधिक महसूस किया जा रहा है। बलौदाबाजार, पेंड्रा और अंबिकापुर में लोग सुबह और शाम अलाव का सहारा ले रहे हैं। हालांकि कई सार्वजनिक स्थानों पर पर्याप्त अलाव की व्यवस्था न होने से लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

राज्य के मैदानी जिले भी इस बार तेजी से ठिठुरन की चपेट में हैं। दुर्ग में रात का तापमान 10.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से करीब सात डिग्री कम है, इसे वर्तमान सीजन का सबसे ठंडा मैदानी शहर बना रहा है। राजधानी रायपुर में भी नवंबर के नौ वर्षों में दूसरी बार रात का तापमान 13 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा है।

पिछले 24 घंटों के तापमान आंकड़ों पर नजर डालें तो दुर्ग का अधिकतम तापमान 30.2 डिग्री सेल्सियस रहा जबकि अंबिकापुर सबसे ठंडा रहा जहां न्यूनतम तापमान 7.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

नवंबर आमतौर पर ठंड की शुरुआत का महीना माना जाता है, लेकिन इतिहास गवाह है कि यह महीना कई बार चरम मौसमी उतार-चढ़ाव लेकर आया है।

मौसम विज्ञान केंद्र के पुराने रिकॉर्ड बताते हैं कि दो नवंबर 1935 को अधिकतम तापमान 35.6 डिग्री सेल्सियस पहुंचा था, वहीं 22 नवंबर 1883 की रात 8.3 डिग्री के साथ सबसे ठंडी नवंबर रात के रूप में दर्ज है।

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