रायपुर , अप्रैल 08 -- छत्तीसगढ़ में स्कूली शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य के सरकारी स्कूलों में अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित तकनीक का उपयोग कर विद्यार्थियों की पढ़ने-लिखने और समझने की क्षमता को बेहतर बनाया जाएगा।

शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में इस योजना की रूपरेखा तय की गई। जिसकी जानकारी बुधवार को दी गयी। प्रारंभिक चरण में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में दो जिलों में लागू किया जाएगा, जिसके सफल परिणाम मिलने पर पूरे राज्य में विस्तार किया जाएगा। इस पहल के लिए 15 जिलों से तैयार किए गए लगभग 200 घंटे के शैक्षणिक कंटेंट का उपयोग किया जाएगा।

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के प्रभारी संचालक जेपी रथ ने बताया कि प्राथमिक स्तर के बच्चों में पठन दक्षता सुधारने के लिए एआई तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। वाधवानी एआई के सहयोग से विकसित 'मौखिक धाराप्रवाह पठन (ओआरएफ) टूल' के जरिए बच्चों की पढ़ने की गति और समझ का सटीक मूल्यांकन संभव होगा।

यह टूल वॉयस आधारित एआई मॉडल 'ऑटोमैटिक स्पीच रिकग्निशन' (एएसआर) तकनीक पर काम करता है, जो बच्चों की आवाज को रिकॉर्ड कर उसे टेक्स्ट में बदल देता है। इससे शिक्षक महज कुछ मिनटों में विद्यार्थियों की पठन क्षमता का आकलन कर सकेंगे।

स्थानीय भाषा और बोलियों के अनुरूप इस सिस्टम को प्रशिक्षित करने के लिए प्रदेश के 300 से अधिक स्कूलों से बच्चों की आवाज के नमूने एकत्र किए गए हैं।

योजना के तहत शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा और इस टूल को राज्य के मौजूदा डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में बच्चों का बेसलाइन आकलन किया जाएगा, जिसके आधार पर उन्हें विभिन्न स्तरों में वर्गीकृत कर सुधारात्मक शिक्षण कार्यक्रम चलाया जाएगा। सत्र के अंत में फिर से मूल्यांकन कर प्रगति का आकलन किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि इस मॉडल को पहले राजस्थान और गुजरात में लागू किया जा चुका है, जहां लाखों विद्यार्थियों को इसका लाभ मिला। इसी अनुभव के आधार पर अब छत्तीसगढ़ में भी इसे व्यापक स्तर पर लागू करने की तैयारी की जा रही है।

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