दंतेवाड़ा , जनवरी 09 -- नक्सल उन्मूलन और पुनर्वास की दिशा में एक बड़ी सफलता दर्ज करते हुए दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिले में शुक्रवार को कुल 63 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का संकल्प लिया। आत्मसमर्पण करने वालों में 18 महिला एवं 45 पुरुष माओवादी शामिल हैं। इनमें 36 माओवादियों पर कुल एक करोड़ 19 लाख 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था।
ये सभी माओवादी दरभा डिवीजन, दक्षिण बस्तर, पश्चिम बस्तर, माड़ क्षेत्र एवं ओडिशा राज्य के विभिन्न इलाकों में सक्रिय थे। यह आत्मसमर्पण छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत संचालित "पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन" अभियान से प्रेरित होकर हुआ।
यह सामूहिक आत्मसमर्पण शुक्रवार को डीआरजी कार्यालय दंतेवाड़ा में हुआ, जहां केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) दंतेवाड़ा रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक राकेश चौधरी, पुलिस अधीक्षक गौरव राय, सीआरपीएफ की 111वीं, 195वीं एवं 230वीं वाहिनी के वरिष्ठ अधिकारी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामकुमार बर्मन सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने आत्मसमर्पित माओवादियों का स्वागत करते हुए उन्हें पुनर्वास की प्रक्रिया की जानकारी दी।
पुलिस के अनुसार आत्मसमर्पित माओवादियों में सात माओवादी पर आठ-आठ लाख रुपये, सात पर पांच-पांच लाख , आठ पर दो-दो लाख रुपये, 11 पर एम-एक लाख रुपये और तीन पर 50-50 हजार रुपये का इनमा रखा गया था। शेष माओवादी बिना इनाम के थे लेकिन संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। इन कैडरों पर मुठभेड़, आईईडी विस्फोट, आगजनी, धात लगाकर हमला और सुरक्षाबलों पर हमलों जैसी गंभीर घटनाओं में शामिल रहने के आरोप रहे हैं।
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने कहा कि "पूना मारगेम" अभियान बस्तर में स्थायी शांति और समग्र विकास की दिशा में एक परिवर्तनकारी पहल बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि शासन की संवेदनशील पुनर्वास नीति और सुरक्षाबलों के सतत प्रयासों के चलते माओवादी हिंसा छोड़कर सम्मानजनक जीवन की ओर लौट रहे हैं।
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