रांची , दिसबर 06 -- झारखंड राज्य दफादार चौकीदार पंचायत के बैनर तले राज्यभर के चौकीदारों और दफादारों ने संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर रांची स्थित लोक भवन (पूर्व में राजभवन) के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण दयाल सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस रैली में विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रदर्शन के बाद कार्यक्रम धरने में तब्दील हो गया।
कार्यक्रम की शुरुआत बाबा साहब के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर हुई। इसके बाद वक्ताओं ने कहा कि चौकीदार-दफादार अपनी न्यायसंगत मांगों को लेकर लंबे समय से आवाज उठा रहे हैं, लेकिन सरकार अभी तक ठोस समाधान नहीं निकाल पाई है। उन्होंने कहा कि चौकीदारी व्यवस्था राज्य की ग्रामीण सुरक्षा व्यवस्था की रीढ़ है, जिसे बचाना आवश्यक है।
प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण दयाल सिंह ने कहा कि झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा चौकीदार संवर्ग नियमावली-2015 से संबंधित नियुक्ति और ट्रांसफर पर पारित आदेशों के कारण चौकीदारी व्यवस्था प्रभावित हुई है। उन्होंने सरकार से जनहित में तत्काल अध्यादेश लाकर व्यवस्था को पुनर्जीवित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सेवा से विमुक्त चौकीदारों को पुनः योगदान का अवसर मिले और 01 जनवरी 1990 के पूर्व व बाद में सेवानिवृत्त चौकीदार-दफादारों के आश्रितों की नियुक्ति पूर्व प्रक्रिया के अनुसार हो।
श्री सिंह ने यह भी मांग की कि झारखंड ग्राम चौकीदार (संशोधन) विधेयक-2025 पारित किया जाए, प्रत्येक माह की पहली सप्ताह में वेतन भुगतान सुनिश्चित हो, सभी बकाया वर्दी भत्ते दिए जाएँ और पुलिस की तरह 13 माह के वेतन का प्रावधान लागू किया जाए। योग्यता के आधार पर पदोन्नति, यात्रा भत्ता और प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराने की भी मांग उठी।
श्री सिंह ने ने कहा कि 2015 की नियमावली में बीट का स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद किसी जिले में 100-120 घरों पर आधारित बीट का निर्माण नहीं किया गया है। कई स्थानों पर एक बीट में एक के बजाय 3-4 चौकीदार नियुक्त कर दिए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नियुक्ति प्रक्रिया में स्थानीयता, बीट संरचना और आरक्षण नीति की अनदेखी हुई है, जिसका संगठन विरोध करता है।
रैली को एतवा उरांव, मिथलेश यादव, बाबूलाल दास, उदित पासवान, उमेश पासवान, सरयू यादव, तौहीद आलम, शिबू पहाड़िया सहित कई नेताओं ने संबोधित किया।
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