नयी दिल्ली, दिसंबर 15 -- चुनाव सुधारों को लेकर आज राज्य सभा में हुई चर्चा में सांसदों ने इलेक्ट्राेनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और चुनाव आयोग पर निशाना साधा तथा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता अपनाने का आग्रह किया।
पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा ने कहा कि जिसे 'वोट चोरी' कहा जा रहा है वह 'मेनिपुलेशन ऑफ वोटर्स लिस्ट' है जो कांग्रेस के समय से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष यह कहता है कि वोट चोरी हो रही है लेकिन क्या वह यह बतायेंगे कि उन्होंने चुनावी गलतियों को लेकर कितनी लड़ाई लड़ी है । उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने सभी राज्यों में सुधार संबंधी आदेश जारी कर दिए हैं लेकिन वे वोट चोरी के आरोप लगाकर प्रधानमंत्री पर आरोप लगा रहे हैं इससे प्रधानमंत्री पद की गरिमा कम हो रही है।
उन्होंने कांग्रेस पर प्रहार करते हुए कहा कि वह लोकतंत्र को नष्ट कर रही है और इसी वजह से वह मात्र तीन राज्यों तक ही सीमित रह गई है। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि वोट चोरी के नाम पर श्री मोदी का उपहास किया जा रहा है।
आंध्र प्रदेश से वाईआरसीपी के येर्रम वेंकट सुब्बा रेड्डी ने चुनाव सुधारों की मांग करते हुए चुनाव आयोग से इस दिशा में आग्रह किया ताकि लोगों को कोई संदेह न हो। उन्होंने फॉर्म 17 ए और 17 सी को लेकर सीसीटीवी रिकार्डिंग की मांग की और पूरी मतदान प्रकिया प्रकिया की वेब लाइव स्ट्रीमिंग की मांग की ताकि चुनाव साफ सुथरे और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराये जा सकें।
बिहार से राष्ट्रीय जनता दल के सांसद संजय यादव ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और किसी भी जीवंत लोकतंत्र की पहचान मतदान से नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से तय होती है। आज देश की चुनावी व्यवस्था कई चुनौतियाँ से लड़ रही हैं। देश में 1952 से अब तक 13 बार विशेष गहन पुनरीक्षण हुआ है लेकिन बिहार में इस बार एसआईआर में जो अपारदर्शिता देखने को मिली वह कभी नहीं देखी गयी । इससे जनता की नजर में चुनाव आयोग को लेकर अविश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा कि हाल ही में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं लेकिन सोचने की बात यह है कि आखिरकार उनमें वोट कैसे बढ़े। महाराष्ट्र में 48 लाख वोट जोड़े गए और बिहार में 65 लाख लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए। इसके बावजूद बूथों की संख्या में बढ़ोत्तरी किस आधार पर की गयी। पहले बूथों की संख्या 78 हजार थी लेकिन इस बार के चुनाव में बूथों की संख्या 90 हजार से ज्यादा हो गयी है। इसके अलावा 'एब्सोल्यूट वोटिंग' में 15.26 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। यह बात समझ में नहीं आ रही है कि जब वोट घट रह रहे हैं तो बूथ की संख्या किस आधार पर बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि जब मैच का अंपायर ही विरोधी पार्टी के साथ मिल जाएगा तो लोगों को मैच पर शक ही होगा। चुनाव आयोग अपना कार्य पूर्ण रूप से नहीं कर रहा है और मतदान से 35 दिन पहले 41 हजार करोड़ रुपये लोगों के खाते में किस आधार पर डाले गये।
उन्होंने कहा कि बिहार में एसआईआर की प्रक्रिया मात्र 35 दिनोंं में पूरी कर ली गयी और उस समय बिहार बाढ़ की समस्या से जूझ रहा था और सावन के महीने में लोग कांवड यात्रा पर भी गये थे। चुनावी सुधारों को लेकर हमें कोई समस्या नहीं है लेकिन यह मात्र औपचारिकता नहीं बन कर रह जाए। अभी हाल ही में जो जानकारी सामने आ रही है वह लोगों में चुनाव आयोग को लेकर संदेह पैदा कर रही है क्योंकि जिस तरह से जनता में इस संस्था के प्रति अविश्वास बढ़ा है वह खतरनाक है। यह "स्पेशल इंटेसिव रिवीज़न' नहीं है बल्कि 'स्पेशल पार्टी रिवीज़न' है।
उन्होंने कहा कि दुनिया की कोई भी तकनीक अभेद्य नहीं है और किसी भी प्रणाली को हैक किया जा सकता है। अगर कोई मतदाता ईवीएम की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल पूछता है तो यह कोई अपराध नहीं है। अगर कोई मतदाता सभी वैध दस्तावेज लेकर मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाना चाहता है तो यह कोई अपराध नहीं है। उन्होंने कहा कि मशीन को मानव ने बनाया है और हम चुप रहेंगे तो मशीन जीत जायेगी, जिससे मतदान प्रकिया को लेकर संदेह तो ही होगा। इलेक्शन होना चाहिये लेकिन सलेक्शन नहीं। कई देशों ने ईवीएम को खारिज कर बैलेट पेपर का अपना लिया है और भारत को भी नई पीढ़ी के चुनाव सुधारों की आवश्यकता है।
तेलंगाना से भारत राष्ट्र समिति (बीआरसी) के के सुरेश आर. रेड्डी ने कहा कि चुनावी सुधार बहुत जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि इस बात पर विचार करना जरूरी है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इतनी अधिक संख्या में मतदान में हिस्सा क्यों लेते हैं और अमीर लोगों को मतदान प्रकिय्रा में कोई दिलचस्पी क्यों नहीं है। मध्यम वर्ग को आत्मअवलोकन करना चाहिये कि वे मतदान प्रकिया में भाग क्यों नहीं लेते हैं। उन्होंने कहा कि ईवीएम को लेकर कुछ लाेगाें पर संदेह है और कई क्षेत्र में लोगों को वोट देने से इसलिए मना किया गया क्योंकि वे एक खास पार्टी के पक्ष में मतदान नहीं कर रहे हैं। इस मामले को भी चुनाव आयोग को देखना चाहिये।
श्री रेड्डी ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में सुधार होना चाहिए लेकिन यह पारदर्शी तरीके से हो। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी 'एक राष्ट्र एक चुनाव विचार' का पूरा समर्थन करती है।
केरल से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी(माकपा) के डा जान ब्रिटास ने कहा चुनावी प्रकिया निष्पक्ष एवं पारदर्शी होनी चाहिये और इसमें न केवल चुनावी शु्द्वता बल्कि वैचारिक शुद्वता भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग पूरी तरह स्वतंत्र होना चाहिये क्योंकि अगर किसी मैच का रैफरी ही गड़बड़ करने लग जाये तो लोगों को विश्वास तो कम होगा ही। उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त कि इन दिनों चुनावों में बहुत अधिक धनराशि खर्च की जा रही है और उनकी पार्टी इस पक्ष में है कि चुनावों का खर्चा सरकार ही उठाये।
डा ब्रिटास ने कहा कि चुनाव आयोग के साथ साथ मीडिया की निष्पक्षता भी जरूरी है क्योंकि अगर देश में मीडिया निष्पक्ष होता तो इस बार भारतीय जनता पार्टी को 200 से भी कम सीटें मिलती। उन्होंने चुनावी चंदे को लेकर भी चिंता व्यक्त करते हुये कहा कि उनकी पार्टी इलेक्टोरल बांड के खिलाफ है लेकिन बहुत ही दुख की बात है कि भारतीय जनता पार्टी को जिन 30 कंपनियों ने चंदा दिया था उनमें से 10 के खिलाफ पहले ही ईडी और सीबीआई के छापे पड़ चुके थे।
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