कोलकाता , जनवरी 21 -- चुनाव आयोग ने संकेत दिया है कि गणना पत्रों में संभावित विसंगतियों में सुधार के लिए सुनवाई की अंतिम तिथि और अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की समय-सीमा बढ़ाई जा सकती है, हालांकि इस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया कि यह घटनाक्रम शीर्ष अदालत द्वारा निर्वाचन नामावलियों में "तार्किक विसंगतियों" वाले मतदाताओं की सूची के प्रकाशन और सत्यापन को लेकर विस्तृत निर्देश जारी किए जाने के बाद सामने आया है। फिलहाल, आयोग ने सुनवाई के लिए सात फरवरी को अंतिम तिथि तय की है, जबकि अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी को प्रकाशित की जानी है। हालांकि, आयोग के सूत्रों के अनुसार, उच्चतम न्यायालय के आदेश को देखते हुए सुनवाई की समय-सीमा और अंतिम सूची के प्रकाशन की तारीख दोनों को आगे बढ़ाया जा सकता है।
अदालत के फैसले के अनुरूप, चुनाव आयोग बुधवार को नए दिशा-निर्देश जारी करने वाला है।
यह घटनाक्रम सोमवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर ) से संबंधित सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद हुआ, जिसमें शीर्ष अदालत ने निर्वाचन आयोग के लिए "तार्किक विसंगतियों" वाले मतदाताओं की सूची प्रकाशित करना अनिवार्य कर दिया था।
इसके बाद मंगलवार को अदालत ने सत्यापन और सुनवाई प्रक्रिया के लिए 10 बिंदुओं वाले विस्तृत निर्देश जारी किए। निर्देशों के अनुसार, तार्किक विसंगतियों वाले मतदाताओं की सूची सार्वजनिक रूप से ऐसे तरीके से प्रदर्शित की जानी चाहिए, जो नागरिकों के लिए आसानी से सुलभ हो। ग्रामीण क्षेत्रों में यह सूची पंचायत भवनों और प्रखंड कार्यालयों में, जबकि शहरी क्षेत्रों में वार्ड कार्यालयों में चस्पा की जाएगी। शीर्ष अदालत ने संभावित रूप से प्रभावित मतदाताओं को यह भी अनुमति दी है कि वे दस्तावेज़ या आपत्तियां स्वयं या अधिकृत प्रतिनिधियों के माध्यम से जिसमें बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) भी शामिल हैं जमा कर सकते हैं, बशर्ते प्रतिनिधियों के पास हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान के साथ उचित प्राधिकरण हो।
यह प्रावधान महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि तृणमूल कांग्रेस सहित कई राजनीतिक दल लंबे समय से इस प्रक्रिया में बीएलए की भागीदारी की मांग कर रहे थे। शीर्ष अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि दस्तावेज़ और आपत्तियाँ पंचायत या प्रखंड कार्यालयों में जमा की जा सकती हैं और जिन लोगों ने अब तक दावा या आपत्ति दाखिल नहीं की है, उनके लिए सूची के प्रकाशन की तारीख से अतिरिक्त 10 दिनों की अवधि दी जानी चाहिए। प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए अदालत ने निर्वाचन आयोग और राज्य प्रशासन दोनों को पर्याप्त स्टाफ तैनात करने का निर्देश दिया है।
जिला मजिस्ट्रेटों को स्टाफिंग और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े आदेशों को सख्ती से लागू करने को कहा गया है, जबकि पुलिस महानिदेशक, जिला पुलिस अधीक्षक और जिला मजिस्ट्रेटों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी हो सके। शीर्ष अदालत ने यह भी ज़ोर दिया है कि मतदाताओं को व्यक्तिगत रूप से या अधिकृत प्रतिनिधियों के माध्यम से सुनवाई का अवसर दिया जाए, ताकि अधिकारी निष्पक्ष और सूचित निर्णय ले सकें।
दस्तावेज़ स्वीकार करने या सुनवाई कराने वाले अधिकारियों को प्रस्तुतियों की उचित पावती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि आदेश में रसीद जारी करना अनिवार्य नहीं किया गया है लेकिन सूत्रों के अनुसार पावती या तो रसीद के माध्यम से या जमा किए गए दस्तावेज़ों की फोटोकॉपी पर मुहर लगाकर दी जा सकती है।
अदालत ने सुनवाई के दौरान माध्यमिक परीक्षा के प्रवेश पत्र (माध्यमिक एडमिट कार्ड), जिनमें जन्मतिथि दर्ज होती है, को माध्यमिक उत्तीर्ण प्रमाणपत्र के विकल्प के रूप में स्वीकार करने की भी अनुमति दी है।
आयोग के सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में लगभग 1.40 करोड़ लोगों को एसआई प्रक्रिया के तहत दस्तावेज़ सत्यापन के लिए नोटिस जारी किए गए हैं।
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