पटना , नवंबर 18 -- चुनाव आयोग ने मंगलवार को राजद नेता जगदानंद सिंह के उन आरोपों का खंडन किया कि प्रत्येक इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में 25,000 वोट मतदान शुरू होने से पहले हीं डाले जा चुके थे।
चुनाव आयोग ने एक विज्ञप्ति जारी कर कहा कि श्री सिंह की ओर से लगाये गये आरोप बिलकुल निराधार हैं क्योंकि ईवीएम में छेड़छाड़ किया जाना तकनीकी रूप से बिल्कुल असंभव है। ईवीएम में इंटरनेट, ब्लूटूथ या किसी अन्य नेटवर्क से कोई कनेक्टिविटी नहीं रहती है और इस कारण रिमोट कंट्रोल से संचालित कर मतों की संख्या में परिवर्तन नही किया जा सकता है।
चुनाव आयोग ने कहा, "मतदान से पहले, प्रत्येक ईवीएम को हर उम्मीदवार या उनके प्रतिनिधि के समक्ष '0' वोट प्रदर्शित कर दिखाया जाता है। इसके अलावा सभी राजनीतिक दलों के एजेंटों की उपस्थिति में अनिवार्य मॉक पोल की जाती है, जिसके बाद सभी मॉक वोटों को ईवीएम से हटा दिया जाता है। इस प्रक्रिया के बाद सभी राजनीतिक दलों के एजेंट संयुक्त रूप से घोषणापत्र पर हस्ताक्षर कर प्रमाणित करते हैं कि ईवीएम अब निष्पक्ष और त्रुटिरहित मतदान के लिए पूरी तरह तैयार है।
चुनाव आयोग ने कहा कि इसके अलावा दो स्तरों पर राजनीतिक दल के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में इस तरह की प्रक्रिया(रेंडमाइजेशन) अपनाई जाती है, ताकि किसी को भी यह अंदाजा नही लग पाए कि किस ईवीएम को किस मतदान केंद्र पर भेजा जा रहा है।
आयोग ने स्पस्ट किया कि राजद द्वारा किसी भी स्तर पर किसी भी टूटी हुई सील, विसंगति या आपत्ति की सूचना नहीं दी गई है। इसके अलावा प्रत्येक ईवीएम को एक वीवीपैट इकाई के साथ जोड़ा जाता है, जिससे प्रत्येक वोट सत्यापन संभव हो जाता है। प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में वीवीपैट की सैम्पल गणना एक सांख्यिकीय ऑडिट के रूप में कार्य करती है। आयोग ने साफ किया है कि कहीं भी ईवीएम और वीवीपैट के बीच किसी भी प्रकार की विसंगति की सूचना नहीं मिली।
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