कोलकाता , मार्च 16 -- पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और गृह सचिव को हटाने के कुछ घंटों बाद, चुनाव आयोग ने सोमवार को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), कोलकाता पुलिस आयुक्त और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को बदल दिया है।
इस कदम को चुनाव से पहले निष्पक्ष प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने और प्रशासनिक निगरानी को मजबूत करने के आयोग के प्रयासों के तहत देखा जा रहा है।
आयोग के निर्देशानुसार पीयूष पांडे को पुलिस महानिदेशक के पद से हटा दिया गया है। 1992 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सिद्ध नाथ गुप्ता को नया डीजीपी नियुक्त किया गया है और वे पुलिस महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक (प्रभारी) के रूप में कार्यभार संभालेंगे।
चुनाव आयोग ने कोलकाता पुलिस आयुक्त को भी बदल दिया है। उनके स्थान पर 1996 बैच के अधिकारी सुप्रतिम सरकार अजय नंदा को नियुक्त किया गया है। श्री नंदा एक अनुभवी अधिकारी माने जाते हैं जिन्होंने माओवादी विरोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वे इससे पहले आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस आयुक्त कार्यालय के आयुक्त रह चुके हैं और कोलकाता पुलिस में भी कई पदों पर कार्य कर चुके हैं। उन्हें पश्चिम बंगाल विशेष कार्य बल (एसटीएफ) का पहला महानिरीक्षक भी नियुक्त किया गया था।
आयोग ने राज्य पुलिस के अन्य महत्वपूर्ण पदों में भी फेरबदल किया है। एडीजी (कानून व्यवस्था) विनीत गोयल की जगह 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी अजय मुकुंद रानाडे को नया एडीजी और आईजीपी (कानून व्यवस्था) नियुक्त किया गया है।एक अन्य फेरबदल में, 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी नटराजन रमेश बाबू को जेल महानिदेशक नियुक्त किया गया है।
यह नवीनतम फेरबदल रविवार देर रात चुनाव आयोग द्वारा लिए गए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय के बाद हुआ है, जिसमें पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीना को उनके पदों से हटा दिया गया था।
श्री दुष्यंत नारियाला को नया मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है, जबकि संघमित्रा घोष को गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया है।आयोग ने कहा कि राज्य की चुनाव तैयारियों की समीक्षा के बाद ये बदलाव किए गए हैं और इनका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया के दौरान प्रशासन में निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा रविवार को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित करने के तुरंत बाद इस फेरबदल की घोषणा की गई। राज्य की 294 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होंगे, जबकि मतगणना चार मई को होगी।
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करते हुए आयोग ने कहा था कि चरणों की संख्या कम होने के बावजूद, वह पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र, निष्पक्ष और हिंसा-मुक्त चुनाव सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित