पटना , अक्टूबर 19 -- राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने महागठबंधन समेत अन्य प्रतिद्धंदी दलों को चुनौती देने के लिये अपने कुछ पूर्व सांसदों को चुनावी रणभूमि में उतार दिया है।
दानापुर विधनसभा से राजग के मुख्य घटक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री और पूर्व सांसद राम कृपाल यादव चुनावी अखाड़े में ताल ठोक रहे हैं। भाजपा ने रामकृपाल जैसे वरिष्ठ और अनुभवी नेता को मैदान में उतारकर साफ संदेश दिया है कि वह दानापुर सीट पर दुबारा कब्जा मजबूत जमाना चाहती है। वहीं महागठबंधन के घटक राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने जेल में बंद बाहुबली विधायक रीत लाल यादव को श्री यादव के खिलाफ चुनावी समर में उतार दिया है।
दानापुर विधानसभा क्षेत्र में कभी भाजपा तो कभी राजद का कब्जा होता रहा है। विधायक रीतलाल यादव जहां अपने गढ़ को बचाने के लिए पूरी ताकत झोंकने को तैयार हैं, वहीं राम कृपाल यादव के लिये यहां फिर से भाजपा का 'कमल' खिलाने की चुनौती है।
दानापुर विधानसभा क्षेत्र राजद सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव का भी गढ़ रहा है। वह दानापुर विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 1995 और वर्ष 2000 में निर्वाचित हुये थे।वर्ष 1995 में लालू यादव ने राघोपुर और दानापुर दो सीटों पर जीत हासिल की थी। श्री यादव ने दानपुर सीट छोड़ दी। इसके बाद रिक्त हुयी इस सीट पर हुये वर्ष 1996 के उपचुनाव में भाजपा के विजय सिंह यादव ने जीत दर्ज की थी। आशा देवी ने (भाजपा) के टिकट पर पहली बार फरवरी 2005 के चुनाव में जीत दर्ज की थी।इसके बाद उन्होंने अक्टूबर 2005, वर्ष 2010 और 2015 का चुनाव भी भाजपा के टिकट पर जीता। वर्ष 2020 के चुनाव में आशा देवी के विजय रथ को रोकने के लिये राजद ने बाहुबली नेता रीत लाल यादव पर दाव लगाया था। इस चुनाव में रीतलाल यादव ने आशा देवी को मात दे दी और फिर से दानापुर सीट पर पार्टी का लालटेन रोशन हो गया।
कभी लालू प्रसाद यादव के 'हनुमान' माने जाने वाले राम कृपाल यादव ने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के चुनाव चिन्ह पर पाटलिपुत्र सीट पर चुनाव लड़ा और राजद सुप्रीमो की बेटी मीसा भारती को पटखनी दी थी। इसके बाद वर्ष 2019 में भी इसी सीट पर भाजपा उम्मीदवार श्री रामकृपाल यादव ने राजद उम्मीदवार श्रीमती मीसा भारती को पराजित किया था। हालांकि वर्ष 2024 के पाटलिपुत्र लोकसभा चुनाव में राजद उम्मीदवार मीसा भारती ने बाजी अपने नाम कर ली और रामकृपाल यादव को मात दे दी।रामकृपाल एक बार फिर से अपना दमखम दिखाने के लिये चुनावी अखाड़े में उतर आयें हैं। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में दानापुर सीट का सियासी माहौल गर्म है। इस सीट पर मुकाबला काफी कड़ा होने की उम्मीद है।
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जननायक स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर और प्रिंस ऑफ पार्लियामेंट के नाम से चर्चित स्वर्गीय सत्यनारायण सिंह की जन्मभूमि समस्तीपुर जिले की कल्याणपुर (सुरक्षित) सीट से बिहार के सूचना एवं संपर्क मंत्री और पूर्व सांसद महेश्वर हजारी जदयू के टिकट पर ताल ठोक रहे हैं। वह इस बार के चुनाव में इस सीट को जीतने के साथ ही चुनावी हैट्रिक लगाने की भी पुरजोर कोशिश करेंगे। पूर्व मंत्री रामसेवक हजारी के पुत्र महेश्वर हजारी ने वर्ष 2009 में समस्तीपुर संसदीय सीट पर विजयी पताका लहरायी थी।
कदवा सीट से पूर्व सासंद दुलालचंद गोस्वामी चुनावी समर में अपने प्रतिद्धंदियों से लोहा लेते नजर आयेंगे। श्री गोस्वामी वर्ष 1995 में बारसोई के विधायक बने। इसके बाद श्री गोस्वामी ने वर्ष 2000 और वर्ष 2005 में बारसोई विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2010 में भाजपा से टिकट नही मिलने पर श्री गोस्वामी ने बलरामपुर विधानसभा सीट से बतौर निर्दलीय किस्मत आजमायी और जीत हासिल की।इसके बाद श्री गोस्वामी जदयू में शामिल हो गये। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने श्री गोस्वामी को श्रम संसाधन मंत्री बना दिया। श्री गोस्वामी ने वर्ष 2015 में बलरामपुर विधानसभा क्षेत्र से जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ा। हालांकि इस बार उन्हें शिकस्त का सामना करना पड़ा। श्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले दुलालचंद गोस्वामी को वर्ष 2019 के आम चुनाव में कटिहार लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का अवसर मिला। उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता तारिक अनवर को पराजित कर दिया और पहली बार सासंद बने। हालांकि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में कटिहार संसदीय सीट पर श्री अनवर ने श्री गोस्वामी को पटखनी दे दी। श्री गोस्वामी अब कदवा से चुनाव लड़ रहे हैं और विधानसभा चुनावों में अपनी जीत की हैट्रिक लगाने की पुरजोर कोशिश करेंगे।
जगत जननी मां सीता की जन्मस्थली के रुप में जाना जाने वाले सीतमाढ़ी विधानसभा सीट से पूर्व सांसद और पूर्व मंत्री सुनील कुमार पिंटू चुनावी दंगल में किस्मत आजमां रहे हैं। श्री पिंटू ने इस सीट से वर्ष 2005 फरवरी,2005 अक्टूबर और 2010 के चुनाव में जीत हासिल की थी। हालांकि इस सीट से वह 2015 का चुनाव हार गये। इसके बाद उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में सीतामढ़ी संसदीय सीट से चुनाव जीता। श्री पिंटू अब सीतामढ़ी की सियासी पिच पर चुनावी 'चौका' जड़ने के लिये तैयार हैं।
काराकाट विधानसभा सीट से पूर्व सांसद महाबली सिंह अपना बल दिखाने के लिये बेकरार है। महाबली सिंह ने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में जदयू के टिकट पर चुनाव जीता और सांसद बने। श्री सिंह अब काराकट विधानसभा सीट पर अपना जलवा बिखरेने के लिये तैयार हैं।
समस्तीपुर विधानसभा सीट से जनता दल यूनाईटेड (जदयू) के टिकट पर चुनावी अखाड़े में उतरी पूर्व सांसद अश्वमेघ देवी अपने प्रतिद्धंदियों से लोहा लेती नजर आयेंगी। श्रीमती अश्वमेघ देवी ने वर्ष 2009 में उजियारपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीता था।
जहानाबाद विधानसभा सीट से जदयू के टिकट पर पूर्व सांसद चंद्रेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी अपनी किस्मत आजमां रहे हैं। वर्ष 2019 के आम चुनाव में जहानाबाद संसदीय सीट से उन्हें चुनाव लड़ने का अवसर मिला, जिसमे उन्होंने कड़े मुकाबले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सुरेन्द्र प्रसाद यादव को महज 1751 मतों के अंतर से पराजित किया और पहली बार सांसद पहुंचे। हालांकि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में राजद प्रत्याशी सुरेन्द्र प्रसाद यादव ने श्री चंद्रवंशी को मात दे दी।
अमौर विधानसभा सीट से पूर्व राज्य सभा सांसद साबिर अली जदयू के टिकट पर चुनावी अखाड़े में उतर रहे हैं।
देखना दिलस्प होगा कि 14 नवंबर को चुनाव परिणाम आने के बाद भूतपूर्व सांसद भूतपूर्व ही रह जाते हैं या फिर विधायक बनने में सफल हो पाते हैं।
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