बीजिंग , नवंबर 07 -- चीन ने अपने पहले स्वदेश निर्मित विमानवाहक पोत फ़ुजियान का जलावतरण हैनान द्वीप पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग की उपस्थिति में आयोजित एक समारोह में किया।

चीन की सरकारी संवाद समिति शिन्हुआ ने शुक्रवार को बताया कि यह चीन का तीसरा और स्वदेश निर्मित पहला विमानवाहक पोत है। यह पोत शी जिनपिंग के सैन्य आधुनिकीकरण अभियान का एक सबसे स्पष्ट उदाहरण है। उल्लेखनीय है कि चीन ने 2035 अपनी सेना को पूरी तरह से आधुनिक बनाने का लक्ष्य रखा है।

'सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज' में 'एशिया मैरीटाइम ट्रांसपेरेंसी इनिशिएटिव' के निदेशक ग्रेग पोलिंग ने कहा, "चीनी नेतृत्व के उस दृष्टिकोण के अनुरुप ये विमानवाहक पोत महत्वपूर्ण हैं जिसके अनुसार चीन को एक मजबूत समुद्री नौसेना के साथ एक महान सैन्य शक्ति बनाने का लक्ष्य रखा गया है।"अमेरीकी संसद की एक रिपोर्ट के अनुसार हालांकि चीन में चीन अपनी सैन्य क्षमता का विस्तार इसलिए लगातार कर रहा है कि वह अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को अपने हिसाब से आकार देने का इरादा रखता है। इस रिपोर्ट में चीन को अमेरिका का एक मात्र प्रतियोगी बताया गया है, जो उसके वैश्विक प्रभुत्व को चुनौती दे रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, चीन का लक्ष्य जापान, ताइवान और फिलीपींस से होकर दक्षिण में फैली 'प्रथम द्वीप श्रृंखला' के आसपास दक्षिण चीन सागर, पूर्वी चीन सागर और पीले सागर सहित निकटवर्ती जलक्षेत्रों पर प्रभुत्व स्थापित करना है। चीन प्रशांत महासागर के भीतर 'द्वितीय द्वीप श्रृंखला' पर भी अपना नियंत्रण स्थापित करना चाहता है। उल्लेखनीय है कि इस द्वितीय द्वीप श्रृखंला के पास गुआम और अन्य जगहों पर अमेरिका की भी सैन्य उपस्थिति है।

गौरतलब है कि फ़ुज़ियान में अधिकांश अमेरिकी पोतों पर इस्तेमाल की जाने वाली 'स्टीम कैटापुल्ट' तकनीक से अलग एक विद्युत चुम्बकीय प्रक्षेपण प्रणाली का उपयोग किया गया है जो केवल नवीनतम अमेरिकी नौसेना फोर्ड-श्रेणी के वाहकों में पाई जाती है। यह प्रणाली विमानों और जहाजों पर कम दबाव डालती है एवं अधिक सटीक गति नियंत्रण की अनुमति देती है। यह तकनीक भाप प्रणालियों की तुलना में व्यापक रेंज में विमान भी प्रक्षेपित कर सकती है।

फ़ुज़ियान चीन के पहले दो विमानवाहक पोतों के विपरीत पूरे ईंधन भार के साथ भारी विमान प्रक्षेपित कर सकता है। चीनी नौसेना के अनुसार, इस विमानवाहक पोत ने अपनी 'पूर्ण डेक क्षमता' का प्रदर्शन करते हुए नवीनतम जे-35 स्टील्थ लड़ाकू विमान और जे-15टी भारी लड़ाकू विमान भी प्रक्षेपित किए।

यह वाहक पोत टोही विमानों को ले जाने में भी सक्षम है, जिसका अर्थ है कि यह बिना किसी जमीनी सहायता के भी दूर-दराज के क्षेत्रों में सैन्य सहायता उपलब्ध कराने में सक्षम होगा।

उल्लेखनीय है कि अमेरिकी नौसेना के 11 वाहक पोतों की तुलना में चीन के पास केवल तीन वाहक पोत हैं। सभी चीनी वाहक पोत पारंपरिक ऊर्जा से संचालित होते हैं, जबकि अमेरिकी वाहक पोत परमाणु ऊर्जा का उपयोग करते हैं, जिससे ईंधन भरे बिना लगभग अनिश्चितकालीन संचालन संभव हो जाता है।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि वर्तमान में यूरोप में तीन समर्पित विमानवाहक पोतों कार्यरत हैं, जबकि एक का विकास फ्रांस कर रहा है। फ्रांस के पास परमाणु ऊर्जा से संचालित चार्ल्स डी गॉल और ब्रिटेन के पास दो क्वीन एलिजाबेथश्रेणी के वाहक एचएमएस क्वीन एलिजाबेथ और एचएमएस प्रिंस ऑफ वेल्स हैं।

फ्रांस पीए-एनजी (पोर्टे-एवियन्स डे नोवेल जेनेरेशन) का विकास कर रहा है जो 2038 के आसपास कमीशन होने पर यूरोप का सबसे बड़ा युद्धपोत बन जाएगा।

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