बारां , फरवरी 27 -- मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान से राजस्थान के बारां जिले की सीमा में गत एक पखवाड़े से विचरण कर रहा अफ्रीकन चीताकेपी- 2 अब नये शिकार की तलाश में भटक रहा है।

इससे पहले वह एक नीलगाय और एक बकरे का शिकार कर चुका है। कूनो से आये चीता केपी-2 पिछले एक पखवाड़े से लगातार बारां जिले के किशनगंज और मांगरोल क्षेत्र के जंगलों में घूम रहा है। इससे क्षेत्र के ग्रामीण भयभीत भी हैं।

आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि केपी-2 चीते ने रामगढ़ के ही जंगल में विचरते हुए पार्वती नदी को पार किया। फिर असनावर, घोरिया के जंगलों से निकल कर अब शिकार के लिए मांगरोल के मोरडी, रेनगढ़ की तरफ का रुख कर लिया है। यह इलाका मध्यप्रदेश की सीमा के नजदीक भी है।

वन विभाग के सूत्रों ने बताया कि बीते कुछ दिनों से इस चीते को कोई शिकार नहीं मिल पाया है, इसलिए उसने स्थान परिवर्तन किया है। वह मांगरोल क्षेत्र के जंगलों की तरफ निकला है। वन विभाग ने ग्रामीणों को एहतियात बरतने की सलाह दी है।

बारां के उप वन संरक्षक वी. मनिकराव बड़े ने बताया कि कूनो राष्ट्रीय उद्यान से बारां जिले में पहुंचे इस मेहमान की वन विभाग और कूनो का दल निगरानी कर रहा है। इसे रेनगढ़ और मोरडी गांव की सड़क पर घूमता देखा गया है। चीता केपी-2 अब किशनगंज वन रेंज से मांगरोल वन क्षेत्र में आ गया है।

उप वन संरक्षक विवेकानंद माणिक राव ने आमजन एवं किसानों से ऐहतियात बरतने का आग्रह किया है।

श्री राव ने बताया कि चीता सड़क से उतरकर मोरड़ी के जंगलों की ओर चला गया। यह दिन भर मोरड़ी एवं पार्वती नदी के जंगलों के आसपास ही विचरण करता रहा। इससे लोगों में दहशत रही। वन विभाग का कहना है कि कुछ दिनों से चीते ने कोई शिकार नहीं किया है। संभवत: शिकार के लिए वह लगातार खेतों में पार्वती नदी किनारे स्थित जंगल के आसपास घूम रहा है।

उल्लेखनीय है कि चिता केपी-2 पहले भी एक पखवाड़े तक बारां जिले में ठहराव कर चुका है। यह दूसरा प्रवास है इसलिए यह चीता बारां जिले के जंगलों में पूरी तरह से ढल गया है, वर्तमान में वह सुरक्षित स्थान एवं शिकार को ढूंढ रहा है। फिलहाल चीते की गतिविधियां रेनगढ़, मोरड़ी गांव के जंगलों में देखी जा रही है।

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