बारां , दिसम्बर 04 -- राजस्थान में बारां जिले की शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति ने उपवन संरक्षक वन मंडल को ज्ञापन देकर बारां जिले में मध्यप्रदेश के कूनो से आये मेहमान चीता केपी- 2 की गतिविधियों को बाधित नहीं करने की मांग की है।

शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति के संरक्षक एडवोकेट प्रशांत पाटनी, इंटेक समन्वयक एवं कार्यकर्ता जितेंद्र कुमार शर्मा ने जिला वन अधिकारी को गुरुवार को दिये ज्ञापन में मांग की है कि जिले में पांचवीं बार कूनो से चलकर चीता यहां पहुंचा है। यह बारां जिले के लिए ही नहीं बल्कि राजस्थान भर के पर्यावरण प्रेमियों के लिए उत्साहवर्धक है। कूनो से चीता ने सहज, स्वाभाविक एवं प्राकृतिक तरीके से बारां जिले के जंगलों को चुना है।

उन्होंने बताया कि सर्वाधिक तेज दौड़ने वाले प्राणी चीता के लिए कूनो नेशनल पार्क छोटा क्षेत्र है। उसके लिये इससे बड़ा आवास होना चाहिए जो कूनो से सटा हुआ महज 40 किलोमीटर दूर शाहबाद संरक्षण आरक्षित वन है। यह क्षेत्र चीता के लिए बहुत मुफ़ीद है क्योंकि यहां के जंगलों में कई नदियां है जहां नदी के किनारे लंबे घास के मैदान और हिरण और नीलगाय जैसे वन्य जीव बहुतायत में हैं जो आसान शिकार हैं।

प्रतिनिधि मंडल ने प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) वी. मनिकराव से कहा कि बारां जिले में आये मेहमान का स्वागत किया जाना चाहिए। उसकी प्राकृतिक गतिविधियों को बाधित नहीं किया जाना चाहिए। उसे ट्रेंकुलाइज जैसे अप्राकृतिक और क्रूर तरीके से बलपूर्वक कूनो नेशनल पार्क नहीं भेजा जाए।

इस पर श्री मनिकराव ने आश्वासन देते हुए कहा कि वह भी ऐसा ही सोचते हैं। हम बारां वन मंडल से कूनो नेशनल पार्क में चीता की निगरानी एवं उसकी देखभाल के प्रशिक्षण के लिए एक दल भी भेजने वाले हैं।

शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति ने प्रधानमंत्री को भी भेजे ज्ञापन में कहा है कि राजस्थान उच्च न्यायालय में यह बात पुरजोर उठाई गयी है कि अफ्रीकी चीता का प्राकृतिक गलियारा शाहबाद संरक्षण आरक्षित वन से होकर ही गुजरता है, जो पांचवीं बार चीता के इस जंगल में आने से इस बात की पुष्टि करता है। अगर शाहबाद संरक्षण आरक्षित वन में ग्रीनको एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड अपना हाइड्रो पावर प्लांट लगाती है तो प्रधानमंत्री द्वारा स्थापित अफ्रीकी चीता परियोजना विफल हो जाएगी।

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