नयी दिल्ली , नवंबर 19 -- पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 108वीं जयंती पर चिली की पहली और एकमात्र महिला राष्ट्रपति तथा संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार की पूर्व प्रमुख मिशेल बाचेलेट को यहां बुधवार को 2024 का 'इंदिरा गांधी शांति, निरस्त्रीकरण और विकास पुरस्कार' प्रदान किया गया।

इंदिरा गांधी स्मारक ट्रस्ट की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने यहां जवाहर भवन में आयोजित समारोह में सुश्री मिशेल बाचेलेट को यह पुरस्कार प्रदान किया। पुरस्कार में एक करोड़ रुपए, स्मारक चिन्ह और प्रशस्ति पत्र दिया गया।

श्रीमती गांधी ने इस अवसर पर कहा कि शांति, निरस्त्रीकरण और विकास के लिए 1985 में दुनिया की सबसे असाधारण महिला नेताओं में से एक इंदिरा गांधी की याद में इस पुरस्कार की स्थापना की गयी थी। यह पुरस्कार सामाजिक विकास, शांति, स्थिरता की दिशा में काम करने वाले व्यक्तियों और संस्थानों को प्रदान किया जाता है।

उन्होंने कहा कि यह संयोग है कि भारत की पहली और एकमात्र महिला प्रधान मंत्री रही इंदिरा गांधी के सम्मान में यह पुरस्कार चिली की पहली और एकमात्र महिला राष्ट्रपति मिशेल बाचेलेट को दिया जा रहा है। श्रीमती इंदिरा गांधी ने गरीबी, अभाव, संघर्ष और असमानता को सुधारने के लिए समर्पित भाव से काम करते हुए नीतियां बनाई और उन्हें लागू कर देश को नया आकार दिया।

श्रीमती गांधी ने कहा कि चिली की पूर्व राष्ट्रपति मिशेल बाचेलेट ने प्रारंभिक वर्षों में उत्पीड़न, यातना और निर्वासन की पीड़ा को देखा है। उनका देश, उनके लोग, उनका परिवार और वे स्वयं पराधीनता से पीड़ित रहीं। मैडम बाचेलेट एक प्रशिक्षित चिकित्सा पेशेवर हैं और उन्होंने पहले चिली के स्वास्थ्य मंत्रालय में काम किया और फिर 2000 में स्वास्थ्य मंत्री बनी। वह चिली की पहली महिला रक्षा मंत्री रहीं और दो बार चिली की राष्ट्रपति बनकर इतिहास रचा। राष्ट्रपति के रूप में, उन्होंने सुधारों पर जोर दिया और कमजोर वर्गों के लक्षित कर उनके कल्याण की योजनाएं लाकर अनुकरणीय सुधार किये। उनकी सरकार ने सभी के लिए समानता, अधिकार और स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के कानून बनाए इसीलिए इंदिरा गांधी स्मारक ट्रस्ट के लिए सुश्री मिशेल बाचेलेट को शांति, निरस्त्रीकरण और विकास के लिए इंदिरा गांधी पुरस्कार 2024 प्रदान करना गौरव की बात है।

सुश्री मिशेल बाचेलेट ने पुरस्कार के लिए अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि असाधारण सांस्कृतिक समृद्धि, गहन इतिहास और जीवंत विविधता वाले भारत में एक बार फिर आना उनके लिए सच्चा सौभाग्य है। उन्होंने कहा कि श्रीमती इंदिरा गांधी का मानना था कि राष्ट्र तभी समृद्ध हो सकते हैं जब वे एक-दूसरे के साथ सद्भाव से रहेंगे। यह विश्वास आज की दुनिया में खंडित हो रहा है तो इंदिरा गांधी को याद करना और भी जरूरी हो गया है।

उन्होंने कहा कि वह श्रीमती इंदिरा गांधी के विचारों से गहराई से प्रभावित रही हैं और उन्हीं से प्रेरित होकर उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और लोगों के कल्याण के लिए सुधारात्मक नीतियां बनाई। उनका कहना था कि जीवन के आरंभ में ही उन्हें एहसास हो गया था कि लोगों की भलाई आंतरिक रूप से मानवाधिकारों के सम्मान से जुड़ी हुई है। शांति और प्रगति मानव गरिमा से अलग नहीं हैं और मानव अधिकारों के बिना, मनुष्य के रूप में मानवीय क्षमता का पूर्ण विकास असंभव है। उनका कहना था कि इंदिरा गांधी की दृष्टि को अपनाते हुए शांति, समानता और सम्मान के साथ एक ऐसी दुनिया का निर्माण किया जा सकता है जहां न केवल आकांक्षाएं हों, बल्कि सभी के लिए सच्चाई भी हों।

पुरस्कार समिति के अध्यक्ष शिवशंकर मेनन ने कहा कि शांति, निशस्त्रीकरण और विकास के लिए इंदिरा गांधी पुरस्कार की स्थापना भारत की 20वीं सदी की सबसे महान नेताओं में से एक श्रीमती इंदिरा गांधी और राष्ट्रीय और वैश्विक कल्याण में उनके उल्लेखनीय योगदान की स्मृति में की गई थी।

इस मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ साथ पार्टी के कई अन्य नेता मौजूद थे।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित