नयी दिल्ली , फरवरी 17 -- केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) चिकित्सकों का स्थान लेने के लिए नहीं बल्कि उनकी सहायता के लिए है और इससे डॉक्टरों को जटिल मामलों और महत्वपूर्ण निर्णयों पर अधिक ध्यान देने का अवसर देगा।

श्रीमती पटेल ने मंगलवार को यहां भारत मंडपम में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' के दौरान "नवाचार से प्रभाव: सार्वजनिक स्वास्थ्य में बदलाव लाने वाली एआई" विषय पर एक सत्र में भाग लिया। इस सत्र में सार्वजनिक स्वास्थ्य में एआई की परिवर्तनकारी भूमिका और भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को सशक्त बनाने में इसकी संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।

इस दौरान श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप "भारत के लिए एआई केवल कृत्रिम बुद्धिमत्ता नहीं बल्कि सर्व-समावेशी बुद्धिमत्ता है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई का मूल्यांकन केवल उन्नत एल्गोरिद्म के आधार पर नहीं, बल्कि इस आधार पर होना चाहिए कि यह तकनीक लोगों के जीवन को कितना प्रभावित करती है और स्वास्थ्य असमानताओं को किस हद तक कम करती है।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में स्वास्थ्य एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। भारत की विशाल एवं विविध आबादी, ग्रामीण-शहरी अंतर तथा संक्रामक और असंक्रामक रोगों का दोहरा बोझ विशेष चुनौतियाँ प्रस्तुत करता है। ऐसे परिदृश्य में एआई एक अपरिहार्य सहायक बन जाती है।

उन्होंने बताया कि एआई को रोग निगरानी, रोकथाम, निदान और उपचार सहित स्वास्थ्य सेवा की पूरी श्रृंखला में एकीकृत किया गया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई चिकित्सकों का स्थान लेने के लिए नहीं, बल्कि उनकी सहायता के लिए है। इससे डॉक्टरों को जटिल मामलों और महत्वपूर्ण नैदानिक निर्णयों पर अधिक ध्यान देने का अवसर मिलेगा। "चिकित्सा केवल विज्ञान नहीं, बल्कि एक कला भी है, जिसमें संवेदनशीलता और मानवीय स्पर्श की अहम भूमिका है।

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