नयी दिल्ली , जनवरी 05 -- चावल निर्यातकों ने सरकार से आगामी बजट में इस उद्योग और चावल की महंगी किस्मों को बढ़ावा देने के साथ करों तथा ब्याज में प्रोत्साहन राहत की मांग की है।
भारतीय चावल निर्यातक संघ (आईआरईएफ) के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को सौंपी अपनी प्रस्तुति में देश के कृषि उत्पादों के निर्यात में चावल उद्योग के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा है कि किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण आजीविका, रोजगार सृजन और विदेशी मुद्रा कमाने में इसका योगदान है।
आईआरईएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेम गर्ग ने कहा कि बजट में अनुकूल उपायों का इस उद्योग पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
संघ ने चावल के वैल्यू चेन के लिए आयकर में छूट की मांग की है। उसने कहा है कि धान और चावल की महंगी किस्मों को प्रोत्साहन दिया जाये। उसने निर्यात के लिए ऋण पर ब्याज में चार प्रतिशत छूट की मांग की है। इसके साथ ही निर्यात की खेप के सड़क एवं रेल मार्ग से परिवहन खर्च का तीन प्रतिशत बाद में वापस करने की भी मांग की गयी है।
आईआरईएफ ने सरकार से निर्यात उत्पादों पर शुल्क और करों की वापसी की योजना को आगे भी जारी रखने का अनुरोध किया है। उसने कहा है कि चावल की कुछ किस्मों पर निर्यात शुल्क लगाने का प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
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