चंडीगढ़ , दिसंबर 18 -- पंजाब सरकार ने चालू वित्त वर्ष के दौरान, 278.37 करोड़ रुपये की लागत से 205 ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाएं पूरी की, जिससे पेयजल आपूर्ति की पहुंच, दबाव और विश्वसनीयता में सुधार करके लगभग 2.33 लाख ग्रामीण निवासियों को लाभ हुआ।

राज्य के 176 गांवों को कवर करने वाली 144 जल आपूर्ति योजनाओं से संबंधित एक परियोजना को 160 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गयी है और इसे 2026-27 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इस परियोजना से लगभग 34 लाख ग्रामीण निवासियों को लाभ होगा। इसके अतिरिक्त, 19 जिलों के 127 गांवों को कवर करने वाली 98 योजनाओं के उन्नयन का एक प्रस्ताव, जिसकी अनुमानित लागत 105 करोड़ रुपये है, अनुमोदन के अधीन है।

पंजाब के जल आपूर्ति एवं स्वच्छता मंत्री हरदीप सिंह मुंडियन ने गुरुवार को बताया कि सरकार ने राज्य भर में जल आपूर्ति एवं स्वच्छता अवसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए 2,900 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। उन्होंने कहा कि इस निरंतर वित्तीय सहायता से प्रमुख परियोजनाओं के पूरा होने में तेजी आयी है, प्रौद्योगिकी को अपनाया गया है और जल गुणवत्ता एवं स्वच्छता प्रणालियों को सुदृढ़ किया गया है, जिसका सीधा परिणाम ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में दैनिक जीवन में सुधार के रूप में सामने आया है। उन्होंने कहा कि राज्य में 100 प्रतिशत कवरेज के साथ, वर्तमान में 34 लाख से अधिक परिवारों को स्वच्छ और पेयजल प्राप्त हो रहा है। मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए, राज्य में ग्रामीण विकास के लिए ग्रामीण स्वच्छता क्षेत्र में 2,190.80 करोड़ रुपये की वार्षिक कार्यान्वयन योजना को मंजूरी दे दी गयी है।

श्री मुंडियन ने कहा कि पंजाब ने ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घर में चालू नल कनेक्शन उपलब्ध कराने का लक्ष्य हासिल कर लिया है और ऐसा करने वाला देश का पांचवा राज्य बन गया है। उन्होंने बताया कि 1,706 गांवों को कवर करने वाली 15 प्रमुख सतही जल आपूर्ति परियोजनाओं के माध्यम से जल गुणवत्ता से प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इनमें से चार परियोजनाएं पहले ही चालू हो चुकी हैं, जबकि 11 परियोजनाएं पूर्ण होने के करीब हैं। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से लगभग 25 लाख ग्रामीण परिवारों को विश्वसनीय सतही जल आपूर्ति सुनिश्चित करके लाभ मिलेगा।

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि ऐतिहासिक शहर श्री मुक्तसर साहिब में जल आपूर्ति और सीवरेज कार्यों के उन्नयन के लिए आधारशिला हाल ही में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा 140 करोड़ रुपये के निवेश के साथ रखी गयी है, जिससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में समन्वित बुनियादी ढांचा नियोजन को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्रौद्योगिकी आधारित शासन व्यवस्था प्रमुख फोकस क्षेत्र बनी रही। 897 गांवों को कवर करने वाली 346 जल आपूर्ति योजनाओं में आईओटी आधारित स्वचालन और निगरानी प्रणाली लागू की गयी है। ये योजनाएं वेब और मोबाइल ऐप आधारित डैशबोर्ड से जुड़ी हैं जो वास्तविक समय में परिचालन मापदंडों को ट्रैक करता है, जिससे त्वरित प्रतिक्रिया और बेहतर सेवा वितरण संभव हो पाता है।

इसके अलावा, मंत्री ने कहा कि जल गुणवत्ता निगरानी के लिए एक मजबूत संस्थागत ढांचा स्थापित किया गया है, जिसमें राज्य स्तरीय एक प्रयोगशाला, क्षेत्रीय स्तर की सात प्रयोगशालाएं, जिला स्तरीय 17 प्रयोगशालाएं और ब्लॉक स्तरीय सात प्रयोगशालाओं का त्रिस्तरीय नेटवर्क शामिल है। विभाग इन प्रयोगशालाओं में जीवाणु विज्ञान संबंधी सुविधाओं को मजबूत कर रहा है और लगभग 11.42 करोड़ रुपये की लागत से 17 जिला स्तरीय प्रयोगशालाओं में इसी प्रकार के अनुभाग स्थापित कर रहा है, जिसका लक्ष्य वित्त वर्ष 2025-26 तक पूरा करना है। उन्होंने बताया कि सात प्रयोगशालाओं में बुनियादी ढांचे का विकास और उपकरणों की स्थापना पहले ही पूरी हो चुकी है।

श्री मुंडियन ने बताया कि भूजल में भारी धातुओं की मौजूदगी से प्रभावित गांवों में निवारण के लिए सल्फेट, नाइट्रेट और सेलेनियम से प्रभावित 10 गांवों में 54.33 लाख रुपये की लागत से रिवर्स ऑस्मोसिस (आरओ) संयंत्र स्थापित किए गए हैं। यूरेनियम से प्रभावित 23 गांवों में 5.91 करोड़ रुपये की लागत से सामुदायिक जल शोधन संयंत्रों का निर्माण कार्य चल रहा है और इनके फरवरी 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि 32 आर्सेनिक प्रभावित गांवों में 9.77 करोड़ रुपये की लागत से आर्सेनिक-सह-लौह निष्कासन संयंत्रों के लिए प्रशासनिक मंजूरी दे दी गई है और निविदा प्रक्रिया जारी है। फ्लोराइड से प्रभावित चार गांवों में 38.69 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक जल शोधन संयंत्र भी स्थापित किए गए हैं, जबकि आर्सेनिक से प्रभावित दो गांवों में 18.60 लाख रुपये की लागत से इसी तरह के कार्य दिसंबर 2025 तक पूरे होने की उम्मीद है। पटियाला जिले के रणबीरपुरा गांव में सीएसआर सहायता के तहत एक यूरेनियम निष्कासन संयंत्र स्थापित किया गया है।

जल आपूर्ति एवं स्वच्छता मंत्री ने बताया कि ग्रामीण स्वच्छता क्षेत्र में राज्य भर में 1598 सामुदायिक स्वच्छता परिसरों का निर्माण किया जा चुका है और 580 अतिरिक्त परिसरों पर कार्य जारी है। चालू वित्त वर्ष में 6606 परिवारों को शौचालय उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि 12,967 घरेलू शौचालयों का निर्माण कार्य प्रगति पर है।

जिला स्तरीय गौशालाओं में बीस बायोगैस संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, और 2025-26 तक मलेरकोटला, गुरदासपुर और श्री मुक्तसर साहिब में तीन और संयंत्र स्थापित करने की योजना है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पहलों में तेजी आई है, ब्लॉक स्तर पर 28 प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाइयां पूरी हो चुकी हैं और 22 अन्य इकाइयां निर्माणाधीन हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पन्न शुष्क/प्लास्टिक अपशिष्ट के प्रबंधन के लिए गांवों में 77 अतिरिक्त इकाइयां स्थापित करने की योजना है। उन्होने कहा कि खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) का दर्जा हासिल करने के बाद, पंजाब राज्य अब 31 मार्च, 2026 तक सभी गांवों के लिए ओडीएफ प्लस (मॉडल) का दर्जा प्राप्त करने की दिशा में प्रगति कर रहा है। अब तक, 2250 गांवों ने वैज्ञानिक अपशिष्ट जल प्रबंधन मॉडल अपना लिए हैं, जबकि 1812 गांवों में काम जारी है। इसी प्रकार, 8747 गांवों में स्क्रीनिंग-कम-डीसिल्टिंग चैंबरों का निर्माण किया जा चुका है और 4,260 गांवों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए कम्पोस्ट गड्ढे पूरे हो चुके हैं।

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