राजनांदगांव , नवंबर 03 -- आभार और भावनाओं से भरे वातावरण में राजनांदगांव श्री जैन श्वेतांबर मूर्ति पूजक संघ एवं चातुर्मास समिति द्वारा आयोजित चातुर्मास का समापन हुआ।
इस अवसर पर समाजजनों ने चार माह के अपने अनुभव साझा किए और गीतिका के माध्यम से श्रद्धा और आभार प्रकट किया।
मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने बताया कि मुनि वृंद पांच नवंबर को सत्यम विहार स्थित प्रभात एवं मेहुल कोटडिया के निवास पर स्थान परिवर्तन हेतु प्रस्थान करेंगे तथा छह नवंबर को पुनः जैन बगीचा स्थित उपाश्रय भवन पहुंचकर सुबह 8:45 से 9:45 बजे तक अंतिम प्रवचन देंगे। इसके बाद सात नवंबर को वे ठेकुआ की ओर प्रस्थान करेंगे।
कार्यक्रम की शुरुआत भूमिका कोठारी की गीतिका से हुई। इसके पश्चात किरण कोठारी, ज्योति चौरडिया, नवीन झाबक, गुणवंती गोलछा, हर्षा गोलछा, श्रद्धा बोथरा, डॉ. पायल झाबक, डॉ. श्रीकांत पारख, शांता कोटडिया, अंजली बोथरा और प्रिया कोठारी ने गीतिका एवं उद्बोधन के माध्यम से अपने विचार रखे।
अजय बैद ने संघ की ओर से भावपूर्ण गीत 'विराट में अगर तप को जोड़ दो, वीतराग बन जाता है.' प्रस्तुत कर वातावरण को भाव-विभोर कर दिया।
सकल जैन श्री संघ के अध्यक्ष मनोज बैद ने अपने उद्बोधन में कहा,"चार माह का यह चातुर्मास कैसे बीत गया, यह पता ही नहीं चला।" उन्होंने मुनि भगवंतों से आग्रह किया कि वे समाज में धर्म और आत्मा के उत्थान का बीजारोपण करते रहें।
संयोजक प्रदीप गोलछा ने चातुर्मास की व्यवस्थाओं की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार विभिन्न समितियों का गठन कर युवाओं को जिम्मेदारी दी गई, जिसके परिणामस्वरूप यह आयोजन सफल हुआ।
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