नयी दिल्ली , जनवरी 08 -- जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की अगले सप्ताह होने वाली भारत यात्रा के दौरान छह अत्याधुनिक पनडुब्बियों के भारत में निर्माण से संबंधित समझौते को अंतिम रूप दिये जाने की पूरी संभावना है चांसलर मर्ज 12 जनवरी को दो दिन की भारत यात्रा पर आ रहे हैं। इस दौरान दोनों देश रक्षा, व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी सहित कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर भी चर्चा करेंगे। सूत्रों के अनुसार लगभग 8 अरब डॉलर मूल्य का यह समझौता भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा होगा। इसमें पहली बार पनडुब्बी निर्माण के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण शामिल किया जाएगा।

यह चांसलर मर्ज़ की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है। उनकी यात्रा की शुरूआत अहमदाबाद से होगी जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उनका स्वागत करेंगे। दोनों नेता भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं में प्रगति की समीक्षा करेंगे। बाद में जर्मन चांसलर बेंगलुरु भी जायेंगे। इस साझेदारी के पिछले वर्ष 25 वर्ष पूरे हुए थे।

दोनों पक्षों के बीच चर्चा में व्यापार और निवेश, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, कौशल विकास और मोबिलिटी में सहयोग को बढ़ाने के साथ-साथ रक्षा एवं सुरक्षा, विज्ञान, नवाचार एवं अनुसंधान, हरित और सतत विकास तथा लोगों से लोगों के बीच संबंधों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "दोनों नेता भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी के विविध पहलुओं में हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे, जिसने पिछले वर्ष 25 वर्ष पूरे किए।"पनडुब्बी निर्माण परियोजना के तहत जर्मनी की थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स जीएमबीएच और भारत की मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड मिलकर पनडुब्बियों का निर्माण करेंगी।

थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स इंडिया, जर्मनी की प्रमुख नौसैनिक रक्षा कंपनी की भारतीय इकाई है, जो पनडुब्बी और सतह युद्ध प्रणाली पर केंद्रित है। यह मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स जैसी भारतीय रक्षा संस्थाओं के साथ मिलकर उन्नत पनडुब्बियों के निर्माण में सक्रिय रूप से सहयोग कर रही है, जिसमें व्यापक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण शामिल होगा। इसका उद्देश्य भारत की 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत स्वदेशी नौसैनिक क्षमताओं को बढ़ावा देना है।

यह कंपनी नौसैनिक जहाजों के लिए इंजीनियरिंग, डिजाइन और तकनीकी सहयोग प्रदान करती है और रणनीतिक साझेदारियों के माध्यम से भारत के पनडुब्बी बेड़े के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। हाल के घटनाक्रम बड़े रक्षा सौदों और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर केंद्रित हैं।

पहली बार जर्मनी भारत को पनडुब्बी निर्माण के लिए व्यापक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण देगा, जो भारत की 'मेक इन इंडिया' रक्षा पहल का एक अहम हिस्सा है।

यह सौदा विस्तारित टाइप-214 डिजाइन पर आधारित छह उन्नत पारंपरिक पनडुब्बियों के लिए है, जिनमें अत्याधुनिक एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन प्रणाली होगी। यह तकनीक पनडुब्बियों को पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की तुलना में कहीं अधिक समय तक, लगभग दो से तीन सप्ताह तक, पानी के नीचे रहने में सक्षम बनाती है, जिससे उनकी गोपनीयता और क्षमता बढ़ती है।

परियोजना के तहत पहली पनडुब्बी में 45 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री अनिवार्य होगी, जो बाद की पनडुब्बियों में बढ़कर 60 प्रतिशत हो जाएगी। इस सौदे की कुल लागत लगभग 90,000 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। पहली पनडुब्बी के अनुबंध पर हस्ताक्षर होने के लगभग सात वर्ष बाद, यानी करीब 2032 तक, डिलीवरी होने की संभावना है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित