लंदन , मार्च 26 -- चर्च ऑफ इंग्लैंड ने डेम सारा मुलेली को कैंटरबरी की पहली महिला आर्चबिशप के रूप में प्रतिष्ठित किया है। 1534 में चर्च की स्थापना के बाद से इस पद पर बैठने वाली वह पहली महिला हैं।
यह समारोह बुधवार को कैंटरबरी कैथेड्रल में आयोजित किया गया। इसमें ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ-साथ प्रिंस विलियम और वेल्स की राजकुमारी तथा उनकी पत्नी कैथरीन शामिल हुए।
अपने संबोधन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) की पूर्व नर्स रहीं सुश्री मुलेली ने ऐतिहासिक दुर्व्यवहार के पीड़ितों के पक्ष में खड़े होने और सुरक्षा तथा जवाबदेही पर ध्यान केंद्रित करने का वादा किया।
उन्होंने कहा, "हमें अपने स्वयं के ईसाई चर्चों और समुदायों के लोगों के कार्यों, निष्क्रियता और विफलताओं के माध्यम से नुकसान झेलने वालों के दर्द को नजरअंदाज या कम नहीं करना चाहिए।"नवनियुक्त आर्चबिशप के पूर्ववर्ती श्री जस्टिन वेल्बी ने प्रभावशाली बैरिस्टर जॉन स्मिथ के 1970-80 के दशक के दौरान ब्रिटेन और अफ्रीका में चर्च के भीतर किये गये सिलसिलेवार यौन शोषण को छिपाने के मामले में बढ़ती आलोचना के बाद इस्तीफा दे दिया था।
हाल ही में सुश्री मुलेली को भी मीडिया की आलोचना का सामना करना पड़ा है। कुछ लोगों का मानना है कि उन्होंने ब्रिटेन में देर से गर्भपात चाहने वाले कृत्य को अपराध की श्रेणी से बाहर करने वाले संसदीय विधेयक के खिलाफ पर्याप्त कड़ा रुख नहीं अपनाया। वर्तमान में, ब्रिटेन में महिलाएं कुछ अपवादों को छोड़कर, गर्भावस्था के 24 सप्ताह तक गर्भपात करा सकती हैं।
पिछले हफ्ते हाउस ऑफ लॉर्ड्स में सुश्री मुलेली ने कहा था, "मुझे नहीं लगता कि अपनी गर्भावस्था के संबंध में कदम उठाने वाली महिलाओं पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए, लेकिन मैं बाद के चरणों में होने वाले गर्भपात में किसी तरह की वृद्धि नहीं देखना चाहती।" उन्होंने जोर देकर कहा कि वह गर्भपात से संबंधित संशोधन का समर्थन नहीं करेंगी।
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