एजल , जनवरी 01 -- ट्रल मिजोरम चकमा स्टूडेंट्स यूनियन (सीएमसीएसयू) ने एक बार फिर मिजोर के छात्र एंजेल चकमा की उत्तराखंड में हुई मौत मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूर (सीबीआई) से कराने की मांग दोहरायी और आरोप लगाया कि जांच में गंभीर लापरवाही हुई है तथा अपराध के पीछे नस्लीय मकसद को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

सीएमसीएसयू ने चकमा स्वायत जिला परिषद (सीएडीसी) इलाके के कमला नगर में छात्र संगठन द्वारा आयोजित धरने के बाद अपनी मांग दोहरायी। इस प्रदर्शन में विद्यार्थियों, नागरिक समाज के सदस्यों और सामुदायिक संगठनों ने हिस्सा लिया। घटना की कड़ी निंदा करते हुए सीएमसीएसयू ने उत्तराखंड में देहरादून पुलिस द्वारा मामले को जिस तरह से संभाला गया, उस पर गहरा दुख व्यक्त किया। संगठन ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज करने में देरी की गयी। इस दौरान सीएमसीएसयू हमले के नस्लीय स्वरूप को छिपाने की कोशिशों की ओर इशारा किया और कहा कि विश्वसनीयता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए जांच सीबीआई को सौंपी जाए।

सीएमसीएसयू नेताओं ने पारदर्शिता को सुनिश्चित करने करने के लिए मामले को नयी दिल्ली स्थानांतरित करने की भी मांग की और कहा कि पीड़ित और उसके दुखी परिवार को निष्पक्ष न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि एंजेल चकमा को सिर्फ़ उसके शारीरिक बनावट और चेहरे की विशेषताओं के कारण निशाना बनाया गया था, न कि किसी खास समुदाय से जुड़े होने के कारण। उन्होंने चेतावनी दी कि नस्लीय हिंसा कोई अलग-थलग घटना नहीं है और यह पूर्वोत्तर और भारत भर के अन्य हाशिए पर पड़े समुदायों के लोगों के लिए एक गंभीर खतरा है।

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