इटावा , दिसम्बर 18 -- दो दशक पहले तक कुख्यात दस्युओं के आतंक से जूझने वाली चंबल घाटी को भय के वातावरण से मुक्ति दिलाने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने ग्रामीण इलाकों के बच्चों के हाथाें में कलम पकड़वाने की कवायद शुरु की है।

चंबल घाटी से जुड़े उत्तर प्रदेश के इटावा में पुलिस अब ग्रामीण बच्चों का एडमिशन सरकारी स्कूलों में कराने में जुट गई है ताकि अब कोई बच्चा हाथों में बंदूक ना थामे बल्कि कलम पकड़ कर पढ़ना लिखना सीख सके। मिशन शक्ति के तहत पुलिस की अनूठी पहल ने बीहड़ क्षेत्र के जांगरा गांव में पुलिस के प्रति सम्मान बढ़ा दिया है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने गुरुवार को बताया कि दो दशक पहले तक इटावा के बीहड़ इलाके में कुख्यात डाकुओं का व्यापक आतंक हुआ करता था। दर्जनों नामी और छोटे बड़े डकैत ग्रामीणों को परेशान किया करते थे, डाकुओं के आतंक से भयभीत ग्रामीण अपना घर और जमीन छोड़कर दूसरे राज्यों में जीवन बिताने के लिए चले गए थे। अब ग्रामीण अपने-अपने गांव में वापस लौट आए हैं लेकिन अभी भी दर्जनों गांव का माहौल पढ़ने लिखने लायक नहीं बन पाया है इसीलिए मिशन शक्ति अभियान के तहत इटावा की पुलिस ग्रामीण अंचल में सक्रिय भूमिका अदा करते हुए ग्रामीणों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने की भूमिका में जुट गई है।

एसएसपी ने जांगरा गांव के प्राथमिक विद्यालय में रीता, प्रीति, सोनाक्षी, खुशी, ऋतिका, स्नेहा छात्राएं एवं अमित कुमार व गोलू का विभिन्न कक्षाओं में एडमिशन कराने का सराहनीय कार्य किया। उन्होंने बताया कि इटावा के डाकू प्रभावित बिठौली, सहसों, चकरनगर,भरेह आदि थानों में आने वाले ग्रामीणों के बीच पुलिस संवाद स्थापित करके उनके बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित करने में जुट गए हैं।

उन्होंने कहा कि सभी थानों के थाना प्रभारी के अलावा इटावा के पुलिस अधीक्षक ग्रामीण श्रीश चंद्र की अगुवाई में स्थानीय ग्रामीणों से संपर्क स्थापित करके उनके बच्चों को सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों में प्रवेश दिलाने के साथ-साथ उन्हें पढ़ने के लिए भी जागरूक करने का काम पुलिस स्तर पर किया जा रहा है।

मिशन शक्ति के तहत चलाए गए अभियान के क्रम में इटावा में बिठौली इलाके के जांगरा गांव में लगाई पंचायत में आठ बच्चों का प्राथमिक स्कूल में एडमिशन कराया गया है।

सरकारी स्कूल में एडमिशन होने के साथ ही स्कूली बच्चे बेहद खुश और प्रफुल्लित बने हुए हैं। स्कूली बच्चे कहते हैं कि वह पढ़ना चाहते हैं पुलिस ने उनके घर आकर के उनके माता-पिता से संपर्क स्थापित किया है और स्कूल में पढ़ने के लिए प्रेरित किया है इसी कड़ी में उनका एडमिशन सरकारी स्कूल में कराया गया है।

डाकुओं के आतंक के समय यहां का माहौल कहीं ना कहीं डरावना बना हुआ रहा है और इसीलिए परिवार के लोग स्कूलों में बच्चों को पढ़ने के लिए नहीं भेज पा रहे हैं जब पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों को अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए समझाया तो ग्रामीण अब अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए लालायित हो गए हैं।

पहले ना कोई स्कूल खुलता था और ना ही कोई बच्चा स्कूल जाता था क्योंकि कुख्यात डाकूओं के आतंक ने लोगों के मन में खौफ पैदा करा दिया था। लोग अपने बच्चों को लेकर के दूसरे राज्यों में जीवन अपन के लिए शरण पाए हुए थे। डाकुओं के खात्मे के बाद अपने-अपने गांव लौटे लोग अब एक नई जिंदगी की शुरुआत अपने-अपने बच्चों को पढ़ लिख करके करने में जुटे हुए हैं, जिसमें इटावा पुलिस मिशन शक्ति के जरिए उनका सहयोग करने में जुटी हुई है।

अब हालात में काफी सुधार हुआ है,बच्चे स्कूल में पढ़ने को लालायित है और पुलिस उनके हाथ में कलम पकड़ने का इंतजाम करने में जुट गई है। जिले के बिठौली इलाके के जांगरा गांव में मिशन शक्ति के तहत के चलाए गए अभियान में 8 बच्चों का स्कूल में एडमिशन पुलिस ने करवाया है। इनमें 6 लड़कियां शामिल है।

इटावा के पुलिस अधीक्षक ग्रामीण श्रीश चंद्र बताते हैं कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से हुए संवाद के बाद उन्होंने डाकुओं से प्रभावित गांव के ग्रामीणों से संपर्क स्थापित करके उनके बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ने के लिए जागरूक किया है जिसके बाद ग्रामीणों ने अपने बच्चों का एडमिशन सरकारी स्कूलों में करवाया है निश्चित है कि सरकारी स्कूलों में एडमिशन के बाद दूसरे ग्रामीण अपने-अपने बच्चों का एडमिशन सरकारी स्कूल में करने के लिए प्रेरित होंगे। इसके साथ ही ग्रामीणों के बीच पुलिस की उस छवि में भी कहीं ना कहीं सुधार होगा जो पुलिस को कभी कभी बदनाम करती रहती है।

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