मुरैना , मार्च 01 -- मध्यप्रदेश के मुरैना जिले से गुजरने वाली चंबल नदी में गंगा डॉल्फिन, घड़ियाल और मगरमच्छों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वन विभाग के संरक्षण प्रयासों, स्वच्छ जल प्रवाह और स्थानीय सहयोग के कारण संवेदनशील प्रजातियों को सुरक्षित प्रजनन का अनुकूल वातावरण मिला है।
वन विभाग के सूत्रों के अनुसार हालिया सर्वे में 440 मगरमच्छों के जन्म के बाद इनकी कुल संख्या बढ़कर 1512 हो गई है। वहीं घड़ियालों की संख्या बढ़कर 2938 तक पहुंच गई है। गंगेटिक डॉल्फिन तथा दुर्लभ इंडियन स्कीमर की मौजूदगी में भी वृद्धि दर्ज की गई है।
सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य में मुरैना से पचनदा तक का क्षेत्र सर्वाधिक सुरक्षित पाया गया है। चार से सोलह फरवरी के बीच किए गए इस सर्वे ने चंबल के स्वस्थ पर्यावरण की मजबूत तस्वीर प्रस्तुत की है। लगभग 435 किलोमीटर क्षेत्र में फैले राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य में 12 दिन तक चले सर्वेक्षण से यह स्पष्ट हुआ है कि नदी का पारिस्थितिक तंत्र लगातार सुदृढ़ हो रहा है।
राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य, देवरी (मुरैना) के अधीक्षक श्याम सिंह चौहान ने बताया कि सर्वे की शुरुआत बड़ोदिया और बिंदी घाट से हुई तथा अटारघाट और राजघाट होते हुए पचनदा तक पूरी की गई। घड़ियालों के फैलाव को देखते हुए सर्वे दल पार्वती नदी में भी लगभग 60 किलोमीटर अंदर तक पहुंचा। उन्होंने बताया कि साफ मौसम और स्पष्ट दृश्यता के कारण इस बार गणना अपेक्षाकृत आसान रही, जिससे आंकड़ों की सटीकता भी बढ़ी है।
वन विभाग के अनुसार सबसे उत्साहजनक तथ्य राष्ट्रीय स्तर पर विलुप्तप्राय जलीय जीव गंगेटिक डॉल्फिन को लेकर सामने आया है। जहां पूर्व में प्रति वर्ष 5 से 15 तक की वृद्धि दर्ज होती थी, वहीं इस बार इनकी संख्या में 44 की वृद्धि हुई है और कुल संख्या 155 तक पहुंच गई है। इसी प्रकार दुर्लभ इंडियन स्कीमर की संख्या 266 बढ़कर 1055 तक पहुंच गई है।
यह सर्वे दूरबीन और उच्च गुणवत्ता वाले कैमरों की सहायता से किया गया। पानी की सतह, रेत के टापुओं और नदी किनारों पर मौजूद जीवों की बारीकी से गणना की गई। सर्वे अभियान में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी और वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट के विशेषज्ञों ने भी भाग लिया। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि चंबल में जलीय जीवों की बढ़ती संख्या केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि स्वच्छ और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करती है।
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