मुरैना , जनवरी 08 -- मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा प्रदेश के 26 राष्ट्रीय उद्यानों एवं वन्यजीव अभयारण्यों सहित राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों के लिए जोनल मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया प्रगति पर है। इसी क्रम में राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के ईको-सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) हेतु तैयार किए जा रहे जोनल मास्टर प्लान की समीक्षा के लिए गुरुवार को चंबल संभाग आयुक्त कार्यालय के सभागार में मॉनिटरिंग समिति की बैठक आयोजित की गई।
बैठक की अध्यक्षता चंबल संभाग आयुक्त सुरेश कुमार ने की। बैठक में मुरैना कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़, ग्वालियर के मुख्य वन संरक्षक ललित भारती, वनमंडलाधिकारी मुरैना हरीश चंद्र बघेल, एसडीओ फॉरेस्ट मधु सिंह सिसौदिया, उपायुक्त राजस्व बीएस जाटव, परामर्शदाता संस्था के प्रतिनिधि सहित ईको-सेंसिटिव जोन से जुड़े अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भिंड कलेक्टर किरोड़ी लाल मीणा, श्योपुर कलेक्टर अर्पित वर्मा सहित अन्य अधिकारी भी बैठक से जुड़े।
बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य का ईको-सेंसिटिव जोन पूर्व में अधिसूचित किया जा चुका है और इसके सुव्यवस्थित, संतुलित व पर्यावरण-अनुकूल विकास के लिए जोनल मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। अहमदाबाद की परामर्शदाता संस्था द्वारा ईएसजेड क्षेत्र एवं उसके आसपास अनुमत और प्रतिबंधित गतिविधियों से संबंधित विस्तृत प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया गया। इसमें बताया गया कि प्रस्तावित गाइडलाइंस पेंच और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में लागू व्यवस्थाओं के अनुरूप होंगी, जिससे जैव विविधता संरक्षण के साथ सतत पर्यटन को बढ़ावा मिल सके।
आयुक्त सुरेश कुमार ने निर्देश दिए कि जोनल मास्टर प्लान स्पष्ट, व्यावहारिक और क्षेत्र-विशेष आधारित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेसलाइन सर्वे की संपूर्ण जानकारी तीनों जिलों के कलेक्टरों के साथ साझा की जाए तथा ईएसजेड में आने वाले गांवों और क्षेत्रों की स्पष्ट सूची तैयार की जाए। गांव-वार और सर्वे नंबर-वार मैपिंग को राजस्व मानचित्रों से समन्वय कर तैयार करने, कंटूर मैप विकसित करने और प्रभावित हितधारकों का स्पष्ट उल्लेख मास्टर प्लान में करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में चंबल नदी के दक्षिणी क्षेत्र से संबंधित आंकड़ों के सत्यापन, ईएसजेड क्षेत्र के 1 से 2 किलोमीटर दायरे में प्रस्तावित औद्योगिक गतिविधियों के लिए एमपीआईडीसी के प्रस्तावों से समन्वय तथा राजघाट पर प्रस्तावित इंटेक वेल से जुड़े तकनीकी एवं भौगोलिक विवरणों को शामिल करने पर भी चर्चा की गई। यह निर्णय लिया गया कि मॉनिटरिंग समिति के सभी सदस्य अपने-अपने विभागीय सुझाव लिखित रूप में प्रस्तुत करेंगे, ताकि उन्हें सम्मिलित कर अंतिम मसौदा तैयार किया जा सके।
बैठक में संभावित पर्यटन गतिविधियों जैसे लो-इम्पैक्ट टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन, सोशियो-फॉरेस्ट्री, इको-फ्रेंडली रिसॉर्ट्स, नेचर ट्रेल, सीमित जल-आधारित गतिविधियां, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, वाटरशेड प्रबंधन तथा चयनित क्षेत्रों में परिवहन सुविधाओं के विकास पर भी विस्तार से चर्चा की गई। आयुक्त ने स्पष्ट किया कि अंतिम स्वीकृति से पूर्व सभी गतिविधियों की सटीक मैपिंग अनिवार्य होगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बना रहे।
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