पटना , मार्च 25 -- बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार 25 से 27 मार्च तक आयोजित त्रिदिवसीय "चंपारण सत्याग्रह महोत्सव" समारोह में बुधवार को मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए और कहा कि चंपारण की धरती पर गाँधी जी का सत्य और अहिंसा से संबंधित किया गया प्रयोग मनुष्य के जीवन में आज भी उतना ही प्रासंगिक हैं।

कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार सरकार तथा जिला प्रशासन, पूर्वी चंपारण के संयुक्त तत्वावधान में कोटवा प्रखंड अंतर्गत गांधी ग्राम जसौली पट्टी में आयोजित त्रिदिवसीय "चंपारण सत्याग्रह महोत्सव" का आज आगाज हुआ।

श्री कुमार ने तीन दिवसीय इस महोत्सव में शरीक होते हुए अपने संबोधन में कहा कि चंपारण की धरती सदैव संस्कृति, संघर्ष और संकल्प की प्रतीक रही है। यहाँ की लोक परंपराएँ और सांस्कृतिक धरोहर समाज को उसकी जड़ों से जोड़ती हैं।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि मोतिहारी की यह ऐतिहासिक धरती देश के स्वतंत्रता संग्राम की दिशा तय करने वाली रही है। यही वह पावन भूमि है, जहाँ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के बल पर अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती देते हुए जनजागरण की अलख जगाई थी। उन्होंने कहा कि चंपारण सत्याग्रह केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि भारत की आत्मा की जागृति का प्रतीक है। किसानों पर हो रहे अत्याचार और शोषण के खिलाफ उठी यह आवाज पूरे देश में स्वतंत्रता के लिए प्रेरणा बनी। उन्होंने कहा कि गाँधी का यह आंदोलन सिखाता है कि सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर भी बड़ी से बड़ी शक्तियों को पराजित किया जा सकता है।

श्री कुमार ने कहा कि आज जब देश विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, तब चंपारण सत्याग्रह के मूल सिद्धांत-सत्य, अहिंसा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक न्याय-और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। इन आदर्शों को आत्मसात कर ही एक समृद्ध, सशक्त और समावेशी समाज का निर्माण संभव है। उन्होंने चंपारण की पावन भूमि को नमन करते हुए वीर किसानों, स्वतंत्रता सेनानियों और महापुरुषों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनके त्याग और बलिदान से देश को स्वतंत्रता प्राप्त हुई।

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