बैतूल , दिसंबर 7 -- मध्यप्रदेश में बैतूल जिले के मुलताई का ऐतिहासिक चंदोरा डैम एक बार फिर अपनी जर्जर स्थिति के कारण खतरे की जद में आ गया है। ताप्ती नदी पर स्थित यह डैम वर्ष 1982 में विश्व बैंक की सहायता से निर्मित किया गया था, जो 1992 में टूट चुका है। इसके बाद अगस्त 2007 में डैम की मुख्य दीवार में बड़ी दरार पड़ी थी, जिसके चलते 100 से अधिक गांवों में हाई अलर्ट जारी कर कई गांव खाली कराए गए थे। अब डैम की दीवारों और संरचना पर फिर से खतरे के संकेत दिखाई देने लगे हैं।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार डैम की मुख्य दीवारों पर बड़े-बड़े बबूल के पेड़ और घनी झाड़ियां उग आई हैं, जिनकी जड़ें दीवारों में गहराई तक प्रवेश कर संरचना को कमजोर कर रही हैं। डैम की मुख्य सड़क और नहर मार्ग पर भी झाड़ियों का जमाव हो चुका है, जिससे किसी भी आकस्मिक स्थिति में राहत और बचाव कार्य बाधित हो सकते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में गंभीर हादसा हो सकता है।

चंदोरा डैम मुलताई क्षेत्र के बिरुलबाजार, सांडिया, दोहलन सहित कई गांवों को पेयजल उपलब्ध कराता है और लगभग 2800 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई इसी डैम पर निर्भर है। डैम की उपेक्षा से हजारों लोगों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है।

जल संसाधन विभाग के एसडीओ एसके मरकाम ने बताया कि डैम के रखरखाव और मरम्मत के लिए फिलहाल पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि टेल मार्ग की सफाई कर दी गई है, जबकि नहर मार्ग और दीवारों की सफाई तथा मरम्मत का कार्य अभी शेष है। ग्रामीणों द्वारा बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद विभाग बजट की कमी के कारण व्यापक मरम्मत कार्य शुरू नहीं कर पा रहा है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित