चंडीगढ़ , मार्च 19 -- चंडीगढ़ नगर निगम के स्मार्ट सिटी फंड से जुड़े करीब 116.84 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच शुरू कर दी है। एजेंसी ने इस मामले को हरियाणा के 590 करोड़ रुपये के बड़े वित्तीय घोटाले से जोड़ते हुए अपनी प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) में शामिल किया है। अब दोनों मामलों की जांच एक साथ की जाएगी।

सूत्रों के अनुसार, जांच के दायरे में रिभव ऋषि, विक्रम वाधवा और उनके सहयोगियों सहित कई लोगों को आरोपी बनाया गया है। ईडी ने कार्रवाई तेज करते हुए 12 मार्च को चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला, गुरुग्राम और बेंगलुरु में कुल 19 स्थानों पर छापेमारी की थी।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सरकारी धन को फिक्स्ड डिपॉजिट में रखने के बजाय बिना अनुमति विभिन्न खातों और कथित फर्जी कंपनियों में ट्रांसफर किया गया। इसके अलावा, सेक्टर-35 स्थित एक ज्वैलरी कारोबारी से जुड़े मामले में 200 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन की भी जांच की जा रही है, जिनका पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

पुलिस एक महिला की तलाश में भी जुटी है, जिसके पास कथित तौर पर सरकारी धन से खरीदे गए सोने के सिक्के होने की आशंका है। साथ ही उसके नाम पर एक शेल कंपनी होने की जानकारी भी सामने आई है। जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क और फंड ट्रेल को खंगालने में जुटी हैं, जिससे इस घोटाले में और खुलासे होने की संभावना है।

उल्लेखनीय है कि चंडीगढ़ नगर निगम पार्किंग घोटाले के मुख्य आरोपी विक्रम वाधवा को गत 14 मार्च को गिरफ्तार किया गया था और वह फिलहाल पुलिस रिमांड पर है। सूत्रों के अनुसार विक्रम वाधवा ने कथित तौर पर एक समय चंडीगढ़ में नींबू पानी की रेहड़ी लगाई थी लेकिन नगर निगम के कुछ अधिकारियों से संपर्क में आने के बाद वह करोड़ों रुपये का मालिक बन गया।

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