चंडीगढ़ , जनवरी 28 -- पंजाब एवं हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ में गुरुवार को होने वाले मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव से ठीक पहले स्थानीय सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने शहर की प्रशासनिक व्यवस्था में आमूल-चूल बदलाव की वकालत करते हुए एक बयान जारी कर पुरजोर मांग की है कि मेयर का चुनाव निर्वाचित पार्षदों के बजाय शहर के मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष रूप से पांच साल के लिए किया जाना चाहिए।
श्री तिवारी ने ऐतिहासिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि साल 1996 से अब तक चंडीगढ़ ने लगभग 30 मेयर और 60 डिप्टी मेयर देखे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि हालांकि इन पदों पर आसीन होने वाले व्यक्ति योग्य रहे होंगे लेकिन मौजूदा ढांचागत व्यवस्था के कारण ये पद 'अधिकारहीन' और 'अप्रभावी' साबित हुए हैं। एक वर्ष का अत्यंत संक्षिप्त कार्यकाल किसी भी मेयर को शहर के विकास के लिए दूरगामी नीतियां बनाने और उन्हें धरातल पर उतारने की अनुमति नहीं देता।
सांसद ने स्पष्ट किया कि यदि वर्तमान प्रणाली सफल होती, तो आज चंडीगढ़ नगर निगम को बार-बार संस्थागत खामियों और गहरे वित्तीय संकट का सामना नहीं करना पड़ता। उनके अनुसार, शहर की समस्याओं का एकमात्र समाधान एक शक्तिशाली और जवाबदेह मेयर प्रणाली में निहित है। इसी दिशा में कदम उठाते हुए उन्होंने पांच दिसंबर 2025 को लोकसभा में एक 'निजी सदस्य विधेयक' भी पेश किया था, जिसमें मेयर को आवश्यक अधिकार और पांच वर्ष का स्थिर कार्यकाल देने का प्रावधान है।
श्री तिवारी ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस सुधार का समर्थन करें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मौजूदा ढांचा नहीं बदला गया, तो ये वार्षिक चुनाव केवल एक औपचारिक प्रक्रिया बनकर रह जाएंगे और चुने गए प्रतिनिधि महज 'सजावटी' पदाधिकारी ही कहलाएंगे। उन्होंने संकेत दिया कि वह आगामी संसदीय सत्र में इस मुद्दे को प्रभावी ढंग से उठाना जारी रखेंगे।
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