भरतपुर , दिसम्बर 07 -- राजस्थान में भरतपुर के विश्व प्रसिद्ध केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (घना) में दुनियाभर के हजारो दुर्लभ परिंदों की चहचाहट के बीच 11 प्रमुख जलपक्षी प्रजातियों के नदारद रहने के साथ कई अन्य प्रजातियों के पक्षियों की संख्या भी सामान्य से कम पाए जाने पर पक्षी विशेषज्ञों एवं पक्षी प्रेमियों में चिंता की लहर दौड़ गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इन रंगीन परिंदों की चहचहाहट की आवाज से गूंजने वाले केवलादेव पार्क में रिक्त महसूस की जा रही है। पार्क के सूत्रों ने बताया कि एशियन वॉटर बर्ड्स सेंसस-2025 की रिपोर्ट के अनुसार घना में इन परिंदों की अनुपस्थिति को लेकर विशेषज्ञ इसके लिए जलवायु परिवर्तन, वैश्विक वेटलैंड्स में बदलाव और प्रवासी मार्गों में परिवर्तन को जिम्मेदार मान रहे हैं।

घना प्रशासन का कहना है कि पक्षी मौजूद हैं, संभवतः गणना के समय वे अन्य क्षेत्रों में चले गए हों। इसके बावजूद लगातार घटती उपस्थिति विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। इस सबके बीच घना में वन्यजीव गणना-2025 ने उत्साहजनक संकेत भी दिए हैं। पेंटेड स्टॉर्क की संख्या बढ़कर 2,577 हो गई, जो इसे उद्यान की सबसे बड़ी कॉलोनी बनाती है। कॉमन कूट की रिकॉर्ड 7,122 गिनती दर्ज हुई जबकि फाल्केटेड टील नामक दुर्लभ बतख प्रजाति पहली बार देखी गई।

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