मुरैना , जनवरी 06 -- मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में चंबल नदी पर बने चंबल अभयारण्य क्षेत्र में घड़ियालों के कई बच्चों की लोकेशन मगरमच्छों के पेट के अंदर मिलने के बाद मगरमच्छों द्वारा उनका शिकार किए जाने के खुलासे ने विशेषज्ञों की बैचेनी बढ़ा दी है।

घड़ियालों के बच्चों को इस क्षेत्र में ट्रांसमीटर लगा कर छोड़ा गया था, जिसके चलते इस बात का खुलासा हो सका कि मगरमच्छों ने घड़ियालों के बच्चों को अपना शिकार बना लिया है। इसी बीच घड़ियालों की संख्या नहीं बढ़ने ने भी जलीय जीव विशेषज्ञों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।

वन विभाग के सूत्रों के अनुसार जिस चंबल नदी को देश में घड़ियालों का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता रहा है, वहीं अब उनके बच्चों की जान खतरे में हैं। चार सौ पैंतीस किलोमीटर क्षेत्र में फैले चंबल घड़ियाल सेंचुरी के अभी हाल ही में निगरानी सर्वे में खुलासा हुआ है कि तीन साल तक के एक सौ बीस सेंटीमीटर लंबे घड़ियाल लगातार मगरमच्छों के हमले का शिकार हो रहे हैं।जानकारी के अनुसार वन विभाग की गो एंड रिलीज योजना के तहत घड़ियालों पर लगाए गए रेडियो ट्रांसमीटर से इसकी पुष्टि हुई है। ट्रांसमीटर सही सलामत मिले, लेकिन उनकी लोकेशन नदी में नहीं, बल्कि मगरमच्छों के पेट से ट्रेस हुई।

बताया गया है कि जब जांच आगे बढ़ी तो मगरमच्छों के मल से घड़ियालों के अवशेष मिलने से इसकी स्पष्ट रूप से पुष्टि हुई। सूत्रों ने बताया कि चंबल सेंचुरी में पहली बार इसे आधिकारिक तौर पर दर्ज किया गया है। जानकारी में बताया गया है कि वरिष्ठ अधिकारियों सहित जलीय जीव विशेषज्ञ की टीम अब यह पता लगाने के प्रयास में लगी है कि आखिर घड़ियालों का सबसे सुरक्षित स्थान कैसे उनकी शिकारगाह बनता जा रहा है। कहा गया है कि देश में घड़ियालों के सुरक्षित सरंक्षण के लिए जब नदियों का अध्ययन किया गया तो चंबल नदी को सबसे स्वच्छ और अनुकूल पाया गया। साफ पानी और उपयुक्त, प्राकृतिक वातावरण में ही घड़ियाल बेहतर तरीके से जीवित रह पाते हैं। इसी आधार पर 1978 और 79 में मुरैना जिले के देवरी गांव के समीप देवरी घड़ियाल सेंचुरी की स्थापना की गई।

वन विभाग सूत्रों के अनुसार 2025 की गणना के अनुसार सेंचुरी में घड़ियालों की संख्या बढ़कर दो हजार 462 तक पहुंच गई जबकि सेंचुरी की स्थापना बाद 1978-79 में नदी में मात्र 75 घड़ियाल छोड़े गए थे। जलीय जीव विशेषज्ञ के मुताबिक चंबल सेंचुरी में घड़ियालों की संख्या जिस अनुपात में बढ़नी चाहिए थी वह नहीं बढ़ सकी। इसकी बड़ी वजह यह भी है कि चंबल नदी में आने वाली बाढ़ के दौरान घड़ियालों के सिर्फ तीन प्रतिशत बच्चे ही जीवित रह पाते हैं। इसके अलावा वयस्क मगरमच्छ तीन साल तक के घड़ियालों को अपना शिकार बना रहे हैं। इस बात का खुलासा एमसीबीटी (मद्रास कोको डायल बैंक ट्रस्ट) की रिपोर्ट में भी हुआ है।

सूत्रों के अनुसार चंबल नदी के घड़ियालों पर मगरमच्छ हमले ओर शिकार की जानकारी वन विभाग को करीब आठ साल पहले ही वर्ष 2017-18 में हीं मिल चुकी थी लेकिन इसे लंबे समय तक दबाए रखा गया। अब जब घड़ियालों के शिकार की घटनाएं लगातार सामने आने लगीं तो हाल ही में देवरी घड़ियाल सेंचुरी में पहला मामला दर्ज किया गया।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित