लखनऊ , दिसम्बर 03 -- उत्तरप्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक (तकनीकी सेवाएं) नवीन अरोरा (आईपीएस) ने कहा कि घटना स्थल पर साक्ष्यों का संरक्षण और सैंपलिंग विवेचना की रीढ़ है। यदि सैंपल वैज्ञानिक तरीकों से सही उठाए जाएं तो निर्दोष व्यक्ति न अपराध में फंसेगा, न दंड पाएगा और निर्दोष को बचाना पुलिसिंग का पुण्य कार्य है। उन्होंने साक्ष्यों की चेन ऑफ कस्टडी को सुनिश्चित करने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि कहीं भी चूक अपराधी को लाभ पहुंचा सकती है।

बुधवार को उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज (यूपीएसआईएफएस), में "क्राइम सीन मैनेजमेंट" कोर्स का विधिवत शुभारम्भ किया गया। कोर्स का उद्देश्य फोरेंसिक सिद्धांतों के अनुरूप पुलिस बल को वैज्ञानिक जांच के नवीनतम कौशल से सशक्त बनाना है।

कार्यक्रम का उद्घाटन यूपीएसआईएफएस के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी और अपर पुलिस महानिदेशक (तकनीकी सेवाएं) नवीन अरोरा (आईपीएस) ने किया। प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आरक्षी, मुख्य आरक्षी तथा उप निरीक्षक स्तर के 100 पुलिस कर्मी इस प्रशिक्षण में भाग ले रहे हैं। इस अवसर पर संस्थान की ओर से एडीजी नवीन अरोरा को सैपलिन व प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित भी किया गया।

संस्थापक निदेशक डॉ. गोस्वामी ने बताया कि 45 दिवसीय यह प्रशिक्षण वर्तमान कानूनों और पुलिसिंग की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। कोर्स को संस्थान के विशेषज्ञ फैकल्टी द्वारा संचालित किया जाएगा। उन्होंने बीएनएसएस की धारा 176(3) के संदर्भ में कहा कि सात वर्ष या उससे अधिक दंड वाले अपराधों में फोरेंसिक टीम द्वारा घटना स्थल का निरीक्षण अनिवार्य है, ऐसे में प्रारंभिक क्राइम सीन हैंडलिंग की जिम्मेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने निठारी कांड के उदाहरण देते हुए क्राइम सीन प्रबंधन में लापरवाही के गंभीर परिणामों पर प्रकाश डाला।

अपर पुलिस महानिदेशक नवीन अरोरा ने प्रशिक्षणार्थियों से अपेक्षा की कि "क्राइम सीन मैनेजमेंट" के इस प्रथम बैच से सर्वश्रेष्ठता और नई परंपरा स्थापित हो। कार्यक्रम के अंत में अपर निदेशक/डीआईजी राजीव मल्होत्रा ने सभी उपस्थित अतिथियों एवं प्रशिक्षणार्थियों का आभार जताया।

इस दौरान अपर पुलिस अधीक्षक जितेन्द्र श्रीवास्तव, अतुल यादव, उप निदेशक अतुल त्रिपाठी, वैज्ञानिक अधिकारी विवेक कुमार, उदय प्रताप सिंह, जनसंपर्क अधिकारी संतोष तिवारी, आरआई वृजेश सिंह, फैकल्टी सदस्य डॉ. निताशा, डॉ. पोरवी सिंह, डॉ. स्वनिल, डॉ. पलक अनेजा, डॉ. मनीष राय, गिरिजेश राय और कार्तिकेय सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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