ग्रेटर नोएडा , मार्च 26 -- उत्त्तर प्रदेश में गौतमबुद्धनगर जिला के ग्रेटर नोएडा में एक रेस्टोरेंट में खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी का गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक ग्राहक को परोसी गई 'मसाला छाछ' की बोतल पर 'मैन्युफैक्चरिंग डेट' (निर्माण तिथि) अंकित नहीं थी, जबकि उस पर '(कब तक इस्तेमाल करें") 26 मार्च' का स्टिकर चिपका हुआ था। इस घटना ने खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्राहक दीपक दुबे जब रेस्टोरेंट में भोजन करने पहुंचे तो उन्हें मसाला छाछ की बोतल सर्व की गई। बोतल पर 'कब तक इस्तेमाल करें"' की तारीख तो स्पष्ट रूप से लिखी थी लेकिन 'मैन्युफैक्चरिंग डेट' गायब थी। ग्राहक ने इस पर आपत्ति जताई और इसे खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन बताया।
गुरुवार को ग्राहक द्वारा बनाया गया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जहां दीपक कहते नजर आ रहे, कि कहीं पुरानी या इस्तेमाल की गई बोतलों को दोबारा इस्तेमाल कर उन पर नए स्टिकर तो नहीं चिपकाए जा रहे। यदि ऐसा है, तो यह न केवल नियमों के खिलाफ है बल्कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।
खाद्य सुरक्षा नियामक भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के अनुसार, किसी भी पैकेज्ड खाद्य उत्पाद पर निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि/बेस्ट बिफोर, बैच नंबर और अन्य आवश्यक जानकारी स्पष्ट रूप से अंकित होना अनिवार्य है। बिना इन जानकारियों के उत्पाद बेचना गैरकानूनी माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिना निर्माण तिथि के उत्पाद का सेवन करना जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि इससे यह पता नहीं चलता कि उत्पाद कितना पुराना है और उसका सेवन सुरक्षित है या नहीं। खराब या एक्सपायर्ड डेयरी उत्पाद से फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
उन्हांने कहा कि पैकेज्ड फूड खरीदते समय लेबल को ध्यान से पढ़ें, निर्माण तिथि और 'बेस्ट बिफोर' जरूर जांचें, और संदिग्ध उत्पाद मिलने पर तुरंत शिकायत करें।
स्थानीय लोगों ने इस मामले की जांच कर संबंधित रेस्टोरेंट के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। खाद्य विभाग से उम्मीद की जा रही है कि वह इस तरह के मामलों पर कड़ी निगरानी रखेगा, ताकि उपभोक्ताओं की सेहत के साथ खिलवाड़ न हो।
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