ग्रेटर नोएडा , जनवरी 08 -- उत्तर प्रदेश में जिला गौतमबुद्धनगर परिक्षेत्र ग्रेटर नोएडा बिसरख पुलिस थाना द्वारा ऑनलाइन गेमिंग गैंबलिंग एप के माध्यम से ठगी का कॉल सेंटर का संचालन करने वाले गिरोह के पांच युवती सहित आठ लोग गिरफ्तार किए गए।
गिरफ्तार लोगों के कब्जे से 18 मोबाइल, फर्जी आईडी पर इस्तेमाल की हुई अलग अलग टेलीकॉम कंपनी के 155 सिम कार्ड और 50 पेमेंट क्यूआर कोड व 45 हजार रुपए नगद सहित कई अन्य उपकरण मौके से बरामद किए गए।
गुरुवार को पुलिस ने जानकारी दी कि गिरफ्तार किए गए गिरोह सदस्य ऑनलाईन गेमिंग खिलवाने का कार्य करते हैं। जो अपने कॉल सेंटर से "मजाबुक मजे से जीतो" एक फर्जी गेमिंग एप संचालित करते है, जिसमें लोगों को ज्यादा पैसा जीतने का लालच दिया जाता है जिस पर लोग उसमें पैसा लगाते हैं। लोगों के द्वारा लगाए गए पैसे पर पहले उन्हे छोटी मोटी राशि जितवा देते हैं जिससे उनका लालच बढ़े और वो अधिक पैसा लगाएं लेकिन फिर जब लोग ज्यादा पैसा लगाने लगते हैं तब धीरे-धीरे उनका पैसा डूबना शुरू हो जाता है।
ग्रेटर नोएडा में कॉल सेंटर के माध्यम से गिरोह द्वारा "मजाबूक मजे से जीतो" नाम की गैंबलिंग गेमिंग एप चलाया जा रहा था, जिसमें क्रिकेट, कैसीनो, एवियेटर, रोलेट, हरालाल(नंबरिंग गेम) जैसे अन्य गेम लोगों से खिलवाते हैं और बेटिंग लगवाते है।
गिरोह का मास्टरमाइंड इन सभी को कॉलिंग के लिए डाटा निकालकर देता है। इसके द्वारा ऐसे व्यक्तियों का डाटा दिया जाता है, जिन्होने कभी ऑनलाईन गेम खेले हों या इस तरह के एडवर्टाइज में इंटरेस्ट दिखाया हो, गिरोह की के अन्य सदस्य युवतियां जो उस डेटा के नंबरों पर कॉल करते हैं और आनलाईन गेम खेलकर ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाने का लालच देते हैं।
मास्टरमाइंड द्वारा ही कॉल करने के लिए फोन, लैपटॉप जैसे अन्य जरूरी सामान उपलब्ध करवाता है तथा सिम कार्ड फर्जी आईडी पर खरीदे जाते हैं,यह लोगो को बेटिंग करने के लिए प्रेरित करते हैं तथा उन्हे लुभाने के लिए बोनस का लालच देते हैं। शुरू-शुरू में ग्राहक पैसा लगाने में हिचकिचाते हैं तो उन्हें शुरू में 1,500 रुपए तक फ्री में गेम खेलने के लिए देते हैं जिन्हें ग्राहक खातों से निकाल नहीं सकते हैं। जब ग्राहक खेलना शुरू करता है तो शुरुआत में उसको जितवाते हैं,जिससे ग्राहक पैसे लगाने के लिए प्रेरित हो।
जब ग्राहक पैसे लगाने के लिए तैयार हो जाता है तो उससे रजिस्ट्रेशन करने के लिए 500 रुपए मांगे जाते हैं, इसके बाद लोगो को झांसे में लेकर लोगों के द्वारा लगाए गए पैसे पर पहले उन्हे छोटी-मोटी राशि जितवा देते हैं, जिससे उनका लालच बढ़े और वो और अधिक पैसा लगाएं।
लेकिन फिर जब लोग ज्यादा पैसा लगाने लगते हैं तो ये गिरोह उन्हें हरवाना शूरू करते हैं क्योंकि गेम में कौन जीतेगा या कौन हारेगा इसका नियंत्रण ठग गिरोह के पास होता है, अगर कोई गलती से जीत भी जाता है और अपनी राशि खाते में ट्रांसफर करने की बात करता है तो गिरोह के सदस्य उसे ब्लाक कर देते हैं और पूरा पैसा हड़प जाते हैं।
गिरोह के लोग कूटरचित केवाईसी में अपनी फोटो लगाकर सभी लोगों को दिखाने के लिए तैयार करते है। जिससे कि इनके द्वारा कॉलिंग के लिए प्रयोग की जा रही सिम को अपने नाम पर जारी किया हुआ दिखा सके और इन्हें कोई पकड़ न सके और क्यूआर कोड के कई प्रतिलिपि पहले से छपवाकर रखते हैं और जब इन्हें पेमेंट लेना होता है तब ये इन क्यूआर कोड को एक्टिवेट करवाकर इनमें पैसा मंगा लेते हैं।
इनके पास से बरामद सभी 50 क्यूआर इण्डियन बैक, सैन्ट्रल बैंक आफ इण्डिया, बैंक आफ महाराष्ट्र, पंजाब नेशनल बैंक, कैनरा बैंक सहित कई अन्य बैंको के विभिन्न खाता और ट्रेडर्स के खातों की डिटेल मिली है। जिसके अंतर्गत देश के विभिन्न राज्यों के स्थानीय पते पर रजिस्ट्रड प्री एक्टिवेटिड सिम बरामद हुए है।
गिरोह का मास्टरमाइंड बीकॉम ग्रेजुएट है, इसके द्वारा दिल्ली में यही काम किया जा रहा था, ट्रेनट्रैक नाम की फर्म पिछले छह माह से संचालित की जा रही है जो कहीं भी रजिस्टर नही है और ना ही कोई जीएसटी नम्बर है, जिसमें कूटरचित दस्तावेजो का इस्तेमाल करके सिम कार्ड लेते हैं और खाते खुलवाए जाते है और उनका प्रयोग गेमिंग एप में कॉल करने एवं पैसा लगवाने के लिए करते है।
पुलिस द्वारा गिरफ्तार ठग गिरोह के सदस्य शिक्षित हैं जिनमें से कुछ ने बीसीए,बीटेक, बीएससी की शिक्षा प्राप्त की हुई है।
गैंबलिंग खिलाने वाले गिरोह की गिरफ्तार व खुलासा करने वाली पुलिस टीम को नगद राशि से पुरस्कृत किया जा रहा है, वही पुलिस ठग गिरोह पर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित कर जेल भेजने की प्रक्रिया पूरी कर रही है।
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