पटना , फरवरी 03 -- बिहार के पूर्णिया, खगड़िया और औरंगाबाद जिले में प्लास्टिक अपशिष्ट के उपयोग से पथों का निर्माण किया गया है।
प्लास्टिक अपशिष्ट से बनने वाले पथ जलरोधी होने के कारण टिकाऊ और दीर्घकालिक होते हैं। इनके रखरखाव की लागत भी कम होती है ।
लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार एवं ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार के अभिसरण से हाल में प्लास्टिक अपशिष्ट के उपयोग से पूर्णिया में कृत्यानंद नगर प्रखंड स्थित मजरा पंचायत के मां कामाख्या स्थान से मध्य विद्यालय, मजरा मुस्लिम टोला तक 4.05 किलोमीटर पथ का निर्माण किया गया है। पथ निर्माण का कार्य ग्रामीण कार्य विभाग, पूर्णिया प्रमंडल द्वारा कराया गया है।
जिला सलाहकार क्षमतावर्धन एवं सूचना शिक्षा संचार, पूर्णिया, रंजीत कुमार ने बताया कि सड़क निर्माण में लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत संचालित प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई से 3.08 मीट्रिक टन प्लास्टिक अपशिष्ट उपलब्ध कराया गया था जिससे इस पथ का निर्माण हुआ है।
औरंगाबाद में प्लास्टिक अपशिष्ट से करीब 5 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया गया है। जिला के रफीगंज प्रखंड स्थित भदवा पंचायत के कजपा-भदवा रोड से भेटनियां गांव तक प्लास्टिक अपशिष्ट से इस पथ का निर्माण हुआ है।
जिला समन्वयक, लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान, औरंगाबाद, अजित शरण ने बताया कि इस पथ के निर्माण में करीब 3500 किलोग्राम प्लास्टिक अपशिष्ट की आपूर्ति लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के द्वारा की गई है तथा इस पथ का निर्माण ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार द्वारा कराया गया है।
खगड़िया में प्लास्टिक अपशिष्ट से एक किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया गया। बीएसएनएल ऑफिस से एसडीओ आवास होते हुए सदर अस्पताल से ओम हॉस्पिटल तक एक किलोमीटर लंबे पथ का निर्माण किया गया है।
जिला समन्वयक, लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान, खगड़िया मीरा कुमारी ने बताया कि पथ निर्माण के लिए लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान, ग्रामीण विकास विभाग द्वारा एकत्रित करीब 1000 किलोग्राम प्लास्टिक का उपयोग हुआ है।
राज्य सलाहकार, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान, रतनीश वर्माने बताया कि कम घनत्व वाले एवं उच्च घनत्व वाले प्लास्टिक, पेट बोतल इत्यादि की कतरन को गर्म डामर के साथ सात प्रतिशत के अनुपात में मिलाया जाता है। जिससे होने वाले पथ निर्माण की गुणवत्ता एवं आयु बढ़ जाती है। इसका मुख्य कारण है कि उस सड़क पर पानी के जमाव से नुकसान नहीं होता है। प्लास्टिक अपशिष्ट के निवारण के लिये यह एक विशिष्ट पहल है।
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