धार , जनवरी 06 -- मध्यप्रदेश में धार जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जल जनित बीमारियों की रोकथाम एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विशेष अभियान के तहत पेयजल स्रोतों का क्लोरीनेशन कार्य सतत रूप से किया जा रहा है। जिले के सभी विकासखंडों में स्थापित हैण्डपंप, कुएं, नल-जल योजनाओं के स्रोत तथा समूह जल प्रदाय योजनाओं के अंतर्गत जल शुद्धिकरण संयंत्रों और संपवेल में नियमित रूप से क्लोरीनेशन की कार्रवाई की जा रही है।
विभागीय उपयंत्रियों एवं मैदानी अमले द्वारा पेयजल स्रोतों से जल नमूने एकत्र कर विभागीय जल परीक्षण प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं। प्रयोगशाला में दूषित पाए गए जल नमूनों का प्राथमिकता के आधार पर क्लोरीनेशन कराया जा रहा है।
विकासखंड तिरला की ग्राम पंचायत अड़वी के ग्राम अड़वी में फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से जल परीक्षण किया गया। इस दौरान ग्रामीणों को टोटियां लगाने एवं सुरक्षित पेयजल उपयोग के संबंध में समझाइश दी गई। कार्यक्रम में ग्राम पंचायत के सरपंच, रोजगार सहायक, आशा कार्यकर्ता, वाल्वमेन एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे। ग्राम पंचायत को जल परीक्षण हेतु फील्ड टेस्ट किट एवं रिफिल पैक भी उपलब्ध कराए गए।
विकासखंड धरमपुरी में जनपद पंचायत कार्यालय में मुख्य कार्यपालन अधिकारी की उपस्थिति में विकासखंड की समस्त ग्राम पंचायतों के सरपंच एवं सचिवों को एफटीके किट के माध्यम से जल परीक्षण करने तथा जल जनित बीमारियों की रोकथाम हेतु आवश्यक जानकारी दी गई।
विकासखंड उमरबन की ग्राम पंचायत मिर्जापुर एवं टवलाई बुजुर्ग में नल-जल योजनाओं के पेयजल स्रोतों का जल परीक्षण किया गया। साथ ही ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव एवं ग्रामीणों के साथ पेयजल स्रोतों के आसपास सफाई अभियान चलाकर भविष्य में स्वच्छता बनाए रखने के लिए जागरूक किया गया।
विकासखंड बदनावर की ग्राम पंचायत नागदा के ग्रामों में हैण्डपंप एवं नल-जल योजनाओं के पेयजल स्रोतों से जल नमूने लेकर क्लोरीनेशन की कार्रवाई की गई। इसके अतिरिक्त विकासखंड नालछा की 57 गुणवत्ता प्रभावित बसाहटों तथा विकासखंड धरमपुरी एवं उमरबन की 125 गुणवत्ता प्रभावित बसाहटों की समूह जल प्रदाय योजनाओं के अंतर्गत स्थापित जल शुद्धिकरण संयंत्रों में सफाई एवं आवश्यक सुधारात्मक कार्यवाही की गई।
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