लुधियाना , फरवरी 19 -- पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राज्य के आगामी बजट में खेल बजट बढ़ाने की गुरुवार को घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक किला रायपुर ग्रामीण ओलंपिक में कहा कि बैलगाड़ी दौड़, जो पिछली सरकारों के कार्यकाल में रोक दी गई थी, अब कानून में संशोधन के बाद फिर से शुरू हो गई है। उन्होंने आगे कहा कि जब बच्चे मैदान में पसीना बहाकर पदक जीतेंगे, तो किसी भी नशीली दवाओं के खिलाफ अभियान की आवश्यकता नहीं होगी। उन्होने नई खेल नीति 2023 को राज्य की खेल प्रतिष्ठा को बहाल करने की दिशा में एक कदम बताया, जिसके तहत हर गांव में स्टेडियम बनाए जाएंगे। उन्होंने यह भी घोषणा की कि किला रायपुर में आठ एकड़ के तालाब का सौंदर्यीकरण किया जाएगा और एक आधुनिक पुस्तकालय का निर्माण किया जाएगा।
संरचनात्मक सुधारों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "पंजाब की खेल प्रतिष्ठा को बहाल करने के लिए नई खेल नीति 2023 शुरू की गई थी और अब खेल बजट में भी और वृद्धि की जाएगी।" उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने "खेदान वतन पंजाब दियां" के तीन सफल सत्र आयोजित किए हैं, जिनमें एक ही परिवार की तीन पीढ़ियां भाग लेती नजर आती हैं। उन्होंने कहा, "राज्य सरकार के अथक प्रयासों के कारण आज पंजाब खेलों में देश का नेतृत्व कर रहा है और प्रमुख भारतीय टीमों के कप्तान पंजाब से हैं।"पंजाब सरकार द्वारा नशीली दवाओं के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को दोहराते हुए मुख्यमंत्री मान ने कहा, "पंजाब सरकार ने पंजाब में 'युद्ध नशीएं विरुद्ध' अभियान शुरू किया है और खेल इस लड़ाई में सबसे बड़ा हथियार है।" उन्होंने आगे कहा कि पंजाब के हर गांव में स्टेडियम बनाए जा रहे हैं और यह अत्यंत गर्व और संतोष की बात है कि बच्चे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर पंजाब और देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
इस आयोजन से जुड़ी विरासत को याद करते हुए मान ने कहा कि ध्यान चंद, बलबीर सिंह, उधम सिंह, पृथ्वीपाल सिंह, अजीतपाल सिंह और सुरजीत सिंह जैसे दिग्गज हॉकी खिलाड़ियों ने इस आयोजन में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। उन्होंने आगे कहा कि मिल्खा सिंह, मक्खन सिंह, प्रद्युमन सिंह, गुरबचन सिंह रंधावा और परवीन कुमार सहित देश भर के शीर्ष एथलीटों ने भी इस ट्रैक पर दौड़ लगाई है। इसकी उत्पत्ति के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि इस स्टेडियम के निर्माण का सपना 1933 में सरदार इंदर सिंह के संरक्षण में देखा गया था, जब ग्रेवाल शिक्षा समिति और ग्रेवाल खेल संघ का गठन हुआ था।
उन्होंने बताया कि यहां कुश्ती के पहले मुकाबले 1933 में हुए थे और 1942 में इस मैदान पर रथ दौड़ शुरू हुई थी, जो 1950 में रथों से छतरियां हटाने के बाद बैलगाड़ी दौड़ में बदल गई। उन्होंने आगे कहा, "बैलगाड़ी दौड़ के साथ-साथ इस स्टेडियम में एथलेटिक्स प्रतियोगिताएं भी शुरू हुईं, जिसने कई पीढ़ियों को खेलों में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रेरित किया।" उन्होंने यह भी बताया कि 1964 में यहां लड़कियों की एथलेटिक्स प्रतियोगिताएं शुरू हुईं, जिससे यह लड़कियों की एथलेटिक्स शुरू करने वाला पहला ग्रामीण स्टेडियम बन गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1933 में शुरू हुए ये खेल अब लोकप्रिय रूप से "मिनी ओलंपिक" या "ग्रामीण ओलंपिक" के नाम से जाने जाते हैं और अतीत में भारत के राष्ट्रपति भी इनमें शामिल हो चुके हैं। मान ने कई विकास कार्यों की घोषणा की। उन्होंने बताया कि गांव की गोलाकार सड़क को 1.5 करोड़ रुपये की लागत से चौड़ा किया जाएगा, ग्राम सहकारी समिति को पुनर्जीवित किया जाएगा, गांव के तालाब को 95 लाख रुपये की लागत से सीचेवाल मॉडल पर विकसित किया जाएगा, ग्राम पुस्तकालय को 10 लाख रुपये की लागत से उन्नत किया जाएगा और छह खिलाड़ियों वाली हॉकी के लिए एस्ट्रोटर्फ मैदान के निर्माण पर 2 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उन्होंने आगे बताया कि देहलों से पाखोवाल तक की सड़क का 30 करोड़ रुपये की लागत से जीर्णोद्धार किया जाएगा और काम जल्द ही शुरू होगा, साथ ही स्टेडियम में फ्लडलाइट्स लगाई जाएंगी।
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