पटना , दिसंबर 22 -- बिहार डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने सोमवार को कहा कि गौशालाओं के प्रबंधन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तकनीकी समाधान अपनाना समय की आवश्यकता है, जिससे न केवल पशुओं का कल्याण होगा बल्कि लोगों को रोजगार भी उपलब्ध होगा।
राज्य में गौशालाओं के सुदृढ़ीकरण के उद्देश्य से आज एक दिवसीय समीक्षात्मक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता करते हुये डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने कहा कि गौशालाओं के प्रबंधन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तकनीकी समाधान अपनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल पशुओं का कल्याण होगा बल्कि लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने का माध्यम होगा।
डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने कहा कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कुत्तों एवं अन्य त्यक्त पशुओं की बढ़ती संख्या जनसुरक्षा के साथ-साथ सड़क सुरक्षा के लिए भी गंभीर समस्या बन चुकी है। उन्होंने कहा कि तेज गति से चलने वाले वाहनों के कारण इन पशुओं से होने वाली सड़क दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में एनएचएआई ,सड़क एवं परिवहन विभाग की समन्वित और प्रभावी भूमिका अत्यंत आवश्यक है। सड़कों पर विचरण कर रहे पशुओं को हटाकर उन्हें सुरक्षित आश्रय गृहों तक पहुंचाया जाना आवश्यक है। जो गोशालाएं वर्तमान में बंद पड़ी हैं, उन्हें शीघ्र कार्यशील बनाया जाए तथा जो गोशालाएं संचालित हैं, उनके बुनियादी ढांचे और प्रबंधन को और सुदृढ़ किया जाए। गोशालाओं का संचालन उसी मूल उद्देश्य के अनुरूप हो, जिसके लिए उनका निर्माण किया गया था। साथ ही, टीकाकरण की शुरुआत भी व्यवस्थित रूप से गोशालाओं से की जाए।
बैठक में राज्य के सभी जिलों में आदर्श गौशालाओं की स्थापना करने की बात कही गई। इस उद्देश्य से एक विस्तृत, समयबद्ध एवं व्यावहारिक कार्य योजना तैयार की जाएगी, जिसके माध्यम से गौशालाओं को न केवल पशु संरक्षण और पशुधन संवर्धन का केंद्र बनाया जाएगा, बल्कि उन्हें ग्रामीण विकास, आत्मनिर्भरता, रोजगार सृजन को बढ़ावा दिया जाएगा।
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