लखनऊ , मार्च 21 -- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के गो-आश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उत्कृष्ट कार्य करने वाली विभूतियों को सम्मानित करने का ऐलान किया है।

गोसेवा आयोग के पदाधिकारियों के साथ शनिवार को हुई बैठक में उन्होंने गो-सेवा को भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न अंग बताते हुए इस क्षेत्र में कार्यरत लोगों के सार्वजनिक सम्मान पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रत्येक गो-आश्रय स्थल में 'भूसा बैंक' स्थापित किया जाए और हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय किसानों से समन्वय बढ़ाया जाए। उन्होंने प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों को भी इन स्थलों से जोड़ने पर बल दिया।

योगी आदित्यनाथ ने सभी गोशालाओं में सीसीटीवी कैमरे लगाने और उनकी सतत निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके लिए कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड के उपयोग पर भी जोर दिया गया, ताकि पारदर्शिता और व्यवस्था मजबूत हो सके। मुख्यमंत्री ने गोसेवा आयोग के पदाधिकारियों को 2-2 के समूह में पूरे प्रदेश का मंडलवार भ्रमण कर निरीक्षण करने के निर्देश दिए। साथ ही विभागीय मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी फील्ड में उतरकर व्यवस्थाओं की निगरानी करेंगे। प्रत्येक निरीक्षण की रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाएगी।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में वर्तमान में 7,527 गो-आश्रय स्थलों में 12.39 लाख से अधिक गोवंश संरक्षित हैं। इनमें अस्थायी स्थल, वृहद गो-संरक्षण केंद्र, कान्हा गो-आश्रय और कांजी हाउस शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने डीबीटी प्रणाली के माध्यम से समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने और प्रत्येक गो-आश्रय स्थल पर गोवंश की दैनिक संख्या का रजिस्टर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तकनीक, पारदर्शिता और जनसहभागिता के जरिए गो-आश्रय स्थलों का संचालन और प्रभावी बनाया जाए।

बैठक में गोबर गैस संयंत्र, वर्मी कम्पोस्ट, गो-पेंट और अन्य उत्पादों के जरिए आत्मनिर्भरता के मॉडल पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने इनके विस्तार पर जोर देते हुए कहा कि गो-संरक्षण ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सतत विकास का मजबूत आधार बन सकता है।

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