बैतूल , अक्टूबर 22 -- दीपावली के अगले दिन बैतूल जिले में गोवर्धन पूजा के अवसर पर बुधवार को एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है। यहां श्रद्धालु अपने छोटे बच्चों को गोबर से बने गोवर्धन पर्वत में बैठाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से बच्चे सालभर निरोगी और सुरक्षित रहते हैं। यह परंपरा बैतूल शहर के कृष्णपुरा वार्ड सहित जिले भर के यादव बाहुल्य कई गांवों और इलाकों में वर्षों से चली आ रही है।

लोगों का विश्वास है कि जैसे भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर ग्वालों की रक्षा की थी, उसी तरह गोवर्धन पर्वत बच्चों को रोगों से बचाते हैं। इसी आस्था के चलते माता-पिता स्वयं अपने बच्चों को गोबर में बैठाते हैं। यह परंपरा केवल ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के कई शिक्षित परिवार भी इसमें आस्था के साथ भाग लेते हैं।

लोक निर्माण विभाग के सेवानिवृत्त लेखापाल कैलाश कुमार यादव ने बताया कि यह परंपरा भगवान इंद्र के क्रोध और कृष्ण द्वारा ग्वालों की रक्षा से जुड़ी है। उनका विश्वास है कि गोवर्धन पर्वत आज भी बच्चों को सुरक्षा का आशीर्वाद देते हैं। वहीं स्थानीय निवासी रामकृष्ण यादव कहते हैं कि उन्होंने वर्षों से यह परंपरा निभाई है और कभी किसी बच्चे को कोई नुकसान नहीं हुआ।

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नितिन देशमुख ने इस परंपरा को बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक बताया। उनके अनुसार, गोबर में कई प्रकार के बैक्टीरिया और कीटाणु पाए जाते हैं, जो बच्चों की त्वचा, सांस और पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। इससे संक्रमण, एलर्जी और त्वचा रोग जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

आस्था और विज्ञान के बीच झूलती यह परंपरा हर साल गोवर्धन पूजा के अवसर पर दोहराई जाती है। जहां एक ओर लोग इसे भगवान का आशीर्वाद मानते हैं, वहीं दूसरी ओर चिकित्सा विशेषज्ञ इसे बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बताते हैं।

पूजा के लिए समाज की महिलाएं सुबह गाय के गोबर से गोवर्धन बनाती हैं। इसके बाद विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। विभिन्न पकवान बनाकर गोवर्धन महाराज को भोग लगाया जाता है, और फिर छोटे बच्चों को स्वास्थ्य लाभ की कामना के साथ इसमें लेटाया जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर ग्वालों की रक्षा की थी। इसी कारण यादव (गवली) समाज में यह मान्यता स्थापित हुई कि गोवर्धन उनकी रक्षा करते हैं। इस आयोजन से पहले यादव समाज द्वारा पूरे क्षेत्र में मंगलगीत गाकर सामूहिक पूजा की जाती है। क्षेत्र में कई स्थानों पर इस प्रकार के आयोजन होते हैं, जिनमें समाज के लोग आतिशबाजी भी करते हैं।

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