नयी दिल्ली , नवंबर 03 -- वाणिज्य एवं उद्योगमंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को भारत की विनिर्माण उद्योग को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए नवाचार, गुणवत्ता, डिजाइन, स्थिरता तथा दक्षता को बढ़ाने पर बल दिया और कहा कि सरकार इसके लिए पूरा नीतिगत सहयोग कर रही है।
श्री गोयल ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा विनिर्माण क्षेत्र पर केंद्रित कार्यक्रम 'इंडियाएज को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी सरकार देश की आर्थिक प्रगति में सहयोग के लिए एक स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ काम कर रही है। उन्होंने कृषि, सेवा और विनिर्माण क्षेत्र में हाल के विकास रुझानों का उल्लेख किया और बताया कि भारत का विनिर्माण उत्पादन इलेक्ट्रॉनिक्स, श्वेत वस्तुओं, रसायनों और पेट्रोकेमिकल्स जैसे नए क्षेत्रों में विविधता पूर्ण हो गया है।
उन्होंने उद्योग जगत के लिए प्रतिस्पर्धी बने रहने और वैश्विक विकास के प्रति संवेदनशील बने रहने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला और कहा कि हाल में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आये व्यवधानों ने देश की आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने के महत्व को रेखांकित किया है।
उन्होंने कहा कि इन व्यवधानों से आपूर्ति के लिए कुछ एक देशों या क्षेत्रों पर अत्यधिक निर्भरता से जुड़े जोखिम भी सामने आये हैं । उन्होंने उन क्षेत्रों की पहचान करने की आवश्यकता पर बल दिया जहाँ घरेलू क्षमता और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर अधिक नियंत्रण आवश्यक है।
श्री गोयल ने कहा कि विनिर्माण उत्पादन बढ़ाने के लिए उद्योग जगत के साथ सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है और उन्होंने कहा कि विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि से सेवाओं के क्षेत्र में वृद्धि को और गति मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि जैसे-जैसे भारत वैश्विक बाजारों में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है, उसे घरेलू अर्थव्यवस्था में भी प्रतिस्पर्धी प्रथाओं के लिए खुला रहना होगा।
वाणिज्य मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश और ओडिशा सहित कई राज्यों ने हाल के वर्षों में तेज़ी से प्रगति की है, जिसके परिणामस्वरूप स्थानीय अवसरों में वृद्धि हुई है और प्रवासन में कमी आई है। उन्होंने उद्योग जगत को प्रक्रियाओं को सरल बनाने, नियामक प्रणालियों में सुधार लाने और विनिर्माण वातावरण को मज़बूत बनाने के लिए सुझाव देने के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने अनुपालन को आसान बनाने, अप्रचलित प्रावधानों को हटाने और चार श्रम संहिताओं को लागू करने सहित कानूनी ढाँचों के आधुनिकीकरण के लिए चल रहे सरकारी प्रयासों का उल्लेख भी किया।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित