नैनीताल , दिसंबर 07 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने 2013-14 में कथित रूप से 48 गैर अनुसूचित जातियों को अनुसूचित जातियों की सूची में शामिल करने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार के गृह, कानून, समाज कल्याण, आधिकारिता तथा उत्तराखंड के समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाबी हलफनामा दायर करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य न्यायाधीश जी0 नरेंदर और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की पीठ ने हरिद्वार निवासी मीनू की जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद शुक्रवार को ये आदेश जारी किए जिसकी प्रति रविवार को मिली।

याचिकाकर्ता की ओर से प्रमुख सचिव समाज कल्याण विभाग की ओर से जारी आदेश को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 341 के अनुसार किसी भी जाति को अनुसूचित जाति में शामिल करने का अधिकार भारत की संसद को है। याचिका में उच्च न्यायालय से राज्य में संवैधानिक व्यवस्था बहाल करने की गुहार लगाई है। याचिका में यह भी कहा गया है कि 26 जनवरी 2016 को जारी राजाज्ञा के अनुपालन में अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति विशेष न्यायालयों की भी स्थापना नहीं की गई है।

अदालत ने सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाबी हलफनामा दायर करने को कहा है। मामले में अगली सुनवाई को 06 जनवरी 2026 को होगी।

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