भोपाल , जनवरी 7 -- मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने गेहूं पर बोनस में 160 रुपए प्रति क्विंटल की कटौती को भाजपा की मोहन यादव सरकार का किसान विरोधी कदम बताया है। माकपा का आरोप है कि सरकार ने विधानसभा चुनाव के पूर्व किए गए वादों से मुकरते हुए किसानों के साथ विश्वासघात किया है।

माकपा के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने जारी बयान में कहा कि पेट्रोल, डीजल, खाद, बीज, बिजली और कृषि उपकरणों की कीमतों में लगातार वृद्धि से खेती की लागत बढ़ गई है। ऐसे में सरकार द्वारा गेहूं बोनस में कटौती करना किसानों के लिए नया संकट पैदा करने जैसा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने चुनाव से पहले गेहूं 2700 रुपए प्रति क्विंटल में खरीदने का वादा किया था, लेकिन अब बोनस में 160 रुपए प्रति क्विंटल की कटौती कर दी गई है।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रुपए प्रति क्विंटल था और राज्य सरकार की ओर से 175 रुपए बोनस दिया जाता था, जिससे किसानों को कुल 2600 रुपए प्रति क्विंटल का भाव मिलता था। इस वर्ष केंद्र सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, लेकिन प्रदेश सरकार ने बोनस को 175 रुपए से घटाकर मात्र 15 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया है। इससे किसानों को इस वर्ष भी गेहूं का भाव केवल 2600 रुपए प्रति क्विंटल ही मिलेगा।

जसविंदर सिंह ने कहा कि यह पहली बार है जब राज्य सरकार ने गेहूं बोनस में कटौती की है और यह कटौती लगभग 91 प्रतिशत है। यदि सरकार बोनस को घटाने के बजाय पिछले वर्ष के बराबर ही रखती, तो किसानों को गेहूं का भाव 2760 रुपए प्रति क्विंटल मिलता। माकपा ने राज्य सरकार के इस निर्णय को किसान विरोधी बताते हुए बोनस कटौती वापस लेने और पुनः 175 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने की मांग की है।

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