नयी दिल्ली , नवंबर 11 -- वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को यहां उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा आयोजित उद्योग समागम 2025 में कहा कि सरकार उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद उपलब्ध करवाने तथा गुणवत्ता नियंत्रण आदेश लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है और राज्यों को इसमें पूरा सहयोग करना चाहिए।

श्री गोयल ने कहा कि उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद उपलब्ध कराने और विनिर्माण में गुणवत्ता की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (क्यूसीओ) लागू किए जा रहे हैं। खिलौनों और प्लाईवुड पर क्यूसीओ की सफलता का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि ऐसे उपायों से भारतीय उद्योगों को मजबूती मिली है और घटिया आयात पर अंकुश लगा है।

इस सम्मेलन का यह दूसरा संस्करण था जिसमें 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के उद्योग और वाणिज्य मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधि व्यापार सुधार कार्य योजना (बीआरएपी) 2024 के तहत प्रगति की समीक्षा करने और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सम्मानित करने के लिए एकत्रित हुए। श्री गोयल ने औद्योगिक विकास को गति देने में मज़बूत केंद्र-राज्य सहयोग के महत्व पर जोर दिया और कहा कि प्रत्येक राज्य ने अच्छी प्रथाएँ विकसित की हैं जो दूसरों के लिए आदर्श बन सकती हैं।

श्री गोयल ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को औद्योगिक प्रोत्साहनों के प्रभावी कार्यान्वयन और निगरानी के लिए किसी बाहरी त्रंत को स्थापित करने का सुझाव दिया ताकि उद्योग जगत का विश्वास बनाए रखने के लिए समय पर वितरण और क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। उन्होंने औद्योगिक विकास के लिए राज्यों में क़ानून-व्यवस्था, समयबद्ध मंज़ूरियों और न्यूनतम भौतिक संपर्क सुविधाओं के विकास पर ध्यान दिये जाने पर ज़ोर दिया।

श्री गोयल ने मध्य प्रदेश द्वारा नाममात्र दरों पर तैयार औद्योगिक सुविधाएँ उपलब्ध कराने के मॉडल की सराहना करते हुए-जिससे लाखों रोज़गार पैदा हुए हैं-उन्होंने अन्य राज्यों से भी इसी तरह के दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने विश्वास बनाने और व्यापार में आसानी बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन भुगतान, प्रतिस्पर्धी बिजली दरों और स्व-प्रमाणन प्रणालियों के लिए एस्क्रो और भारतीय रिजर्व बैंक ( आरबीआई) से जुड़ी व्यवस्थाओं के इस्तेमाल का भी सुझाव दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "शून्य प्रभाव, शून्य दोष" के आदर्श वाक्य का उल्लेख करते हुए, उन्होंने उद्योगों से ऐसे टिकाऊ विनिर्माण अभ्यास अपनाने का आग्रह किया जो पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम रखते हुए गुणवत्ता के उच्चतम मानकों को बनाए रखें।

कार्यक्रम की शुरुआत डीपीआईआईटी के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने की के भाषण से हुई, जिन्होंने कहा कि बीआरएपी वैश्विक स्तर पर सबसे व्यापक उप-राष्ट्रीय सुधार अभ्यासों में से एक बन गया है और कारोबार सुधार कार्यक्रम (बीआरएपी) 2024 के तहत देश भर में सुधार प्रक्रिया गहन हो गई है। इस कार्यक्रम को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ-साथ उद्योग और राज्य के नेताओं ने भी संबोधित किया, जिन्होंने सहयोगात्मक सुधार प्रयासों के माध्यम से प्राप्त प्रगति को स्वीकार किया।

उद्योग समागम 2025 में, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 25 सुधार क्षेत्रों में बीआरएपी 2024 के तहत उत्कृष्टता के लिए सम्मानित किया गया, जिसमें व्यवसाय प्रवेश, निर्माण परमिट, श्रम विनियमन सक्षमकर्ता, भूमि प्रशासन, पर्यावरण पंजीकरण, उपयोगिता परमिट, सेवा क्षेत्र और क्षेत्र-विशिष्ट सेवाओं जैसे डोमेन में सुधारों की गहराई और प्रभाव को प्रदर्शित किया गया।

उत्तराखंड और पंजाब को पाँच सुधार क्षेत्रों में सर्वोच्च उपलब्धि हासिल करने वालों के रूप में मान्यता दी गई।

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