देहरादून, नवंबर 04 -- उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मंगलवार को गुड़ की कटक के साथ चाय पर कांग्रेस जनों और अपने दोस्तों को आमंत्रित करके राज्य के विकास के भावी रोड मैप पर लंबी चर्चा की।

अपने डिफेंस कॉलोनी स्थित आवास पर आयोजित किए गए कार्यक्रम में उन्होंने अपने समर्थकों को पर्वतीय आलू के गुटकों, पिंडालू के साथ-साथ मीठे अमरूदों का स्वाद भी चखाया। इस मौके पर उन्होंने वहां मौजूद पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि गुड़ की गटक के साथ चाय उत्तराखंडी परिवेश का परिचायक रहा है, गुड को कॉटेज इंडस्ट्री के रूप में विकसित करना हमारे इसी संकल्प का परिचायक है।

उन्होंने कहा कि हमारी पहचान जिन उत्पादों के साथ जूड़ी हुई हैं, उनमें एक गुण भी होना अत्यंत आवश्यक है। हरीश रावत ने कहा कि पर्वतीय आलू और पिंडालू हमारे व्यावसायिक व्यंजन का हिस्सा हो सकते हैं। इनमें स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट इत्यादि कम मात्रा होती है,और यह हमारे स्वास्थ्य के लिए उतने हानिकारक भी नहीं हैं। लेकिन हम आलू और पिंडालू को अपने नाश्ते की सूची में सम्मिलित करवाने में सफल नहीं हो पा रहे हैं। इसलिए वह इन व्यंजनों को ब्रेकफास्ट मेन्यू मे शामिल करवाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।

हरीश रावत ने कहा कि उत्तराखंड अमरूद उत्पादन के क्षेत्र में भी निरंतर आगे बढ़ रहा है। हरिद्वार, उधम सिंह नगर ,नैनीताल और देहरादून के कुछ इलाके अमरूद उत्पादन में आच्छादित हो रहे हैं। आज की परिचर्चा में इन सभी उत्पादों से जुड़े सुझाव आमंत्रित किए गए थे, जिसमें उन्हें कई महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए हैं।

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