अहमदाबाद , जनवरी 05 -- गुजरात विश्वविद्यालय के 74वें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलाधिपति एवं राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने सोमवार को कहा कि जीवन में सफलता का कोई 'शॉर्टकट' नहीं है बल्कि परिश्रम ही एकमात्र रास्ता है।
श्री देवव्रत ने स्वामी विवेकानंद के 'उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक लगे रहो' के सूत्र को स्मरण करवाते हुए कहा कि आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। बुद्धिपूर्वक और परिश्रमपूर्वक किया गया पुरुषार्थ कभी निष्फल नहीं जाता। इस दीक्षांत समारोह में 40,245 विद्यार्थियों को उपाधियां, डिप्लोमा एवं प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय द्वारा विशेष रूप से तैयार की गई 'कॉफी टेबल बुक' का विमोचन किया गया तथा विशिष्ट उपलब्धि प्राप्त करने वाले दो स्टार्टअप और एक खिलाड़ी को 'गौरव पुरस्कार' प्रदान किए गए। मेधावी विद्यार्थियों को गणमान्य व्यक्तियों के करकमलों से पदक प्रदान किए गए।
राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री आचार्य देवव्रत ने विद्यार्थियों को प्रेरणादायी संबोधन करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उपाधि प्राप्त करने का दिन नहीं है, बल्कि गुरु, शिष्य और अभिभावकों के त्रिवेणी संगम का पवित्र उत्सव है। उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय संस्कृति के मूल मूल्य 'मातृ देवो भव:, पितृ देवो भव: और आचार्य देवो भव:' को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जो माता-पिता स्वयं अभाव सहकर भी अपने बच्चों को श्रेष्ठ शिक्षा प्रदान करते हैं, उनके प्रति आदर और समर्पण की भावना ही सच्ची दीक्षा है।
उन्होंने गुजरात की भूमि की विशेषताओं का वर्णन करते हुए कहा कि इस धरती ने सदैव राष्ट्र की उन्नति में योगदान देने वाली महान प्रतिभाएं दी हैं। स्वामी दयानंद सरस्वती, नरसिंह मेहता, महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसी विभूतियों ने इसी धरती से देश का नेतृत्व किया है। आज उसी परंपरा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगे बढ़ा रहे हैं, जिन्होंने देश को आशा और प्रगति के नए शिखरों तक पहुंचाया है। आज के युवा सौभाग्यशाली हैं कि वह ऐसे समय में कार्यक्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं, जब भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। चंद्रयान और गगनयान जैसे मिशन भारत की वैज्ञानिक क्षमता और दृढ़ संकल्प का परिणाम हैं, जिनसे युवाओं को प्रेरणा लेनी चाहिए।
इसरो के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने दीक्षांत समारोह में कहा कि गुजरात विश्वविद्यालय ज्ञान का ऐसा पवित्र धाम है, जिसने देश को प्रधानमंत्री श्री मोदी और भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई जैसे दिग्गज रत्न दिए हैं। उन्होंने स्वतंत्रता के बाद भारत की विकास यात्रा का चित्रण करते हुए कहा कि जो देश कभी साइकिल और बैलगाड़ी पर रॉकेट-सैटेलाइट ले जाता था, वह आज विश्व में अनेक क्षेत्रों में अग्रणी स्थान पर है। उन्होंने कहा कि चंद्रयान और मंगल मिशन जैसी सफलताएं सिद्ध करती हैं कि भारत की शिक्षा प्रणाली और प्रतिभा विश्व में किसी से कम नहीं है।
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री त्रिकमभाई छांगा ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की स्नातक उपाधि प्राप्त करना जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि डिग्री केवल आजीविका का साधन न बनकर परिवार और राष्ट्र के उत्थान का महत्वपूर्ण माध्यम बने। स्वयं इसी विश्वविद्यालय के पूर्व विद्यार्थी होने का गौरव व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार पूर्वजों ने भारत माता को गौरव दिलाया है, उसी परंपरा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब युवा पीढ़ी की है।
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