अहमदाबाद , जनवरी 23 -- गुजरात यूनिवर्सिटी ऑफ ट्रांसप्लांटेशन साइंसेज के छठे दीक्षांत समारोह में शुक्रवार को 104 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई।

राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने दीक्षांत समारोह में आज डिग्री प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ट्रांसप्लांटेशन केवल एक चिकित्सा पद्धति नहीं है, बल्कि निराश हो चुके मरीजों के जीवन में पुनः 'वसंत' खिलाने का पुण्य कार्य है।

अहमदाबाद सिविल अस्पताल स्थित मां शारदा लक्ष्मी हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित सभी को मार्गदर्शन देते हुए श्री देवव्रत ने कहा कि जब कोई मरीज अपने अंगों के निष्क्रिय हो जाने से जीवन की आशा छोड़ देता है, तब इस संस्था के डॉक्टर अंग प्रत्यारोपण के माध्यम से उसे नवजीवन प्रदान करते हैं। इसी परोपकारी कार्य के कारण समाज में डॉक्टर को भगवान का स्वरूप माना जाता है। उन्होंने संस्था द्वारा उपयोग में ली जा रही आधुनिक तकनीक तथा हजारों लोगों को मिले जीवनदान के लिए पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं।

राज्यपाल ने आधुनिक जीवनशैली के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर गहन चिंतन प्रस्तुत किया। उन्होंने मनुष्य और प्राणी जगत के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रकृति के अन्य जीव कभी भी प्राकृतिक आहार का त्याग नहीं करते, जबकि मनुष्य अपनी बुद्धि का दुरुपयोग कर गलत आहार-विहार की ओर बढ़ गया है और अनेक बीमारियों को आमंत्रित कर रहा है।

नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के चेयरमैन डॉ. अभिजात शेठ ने दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में केवल डिग्री प्राप्त करना ही अंत नहीं है, बल्कि यह आजीवन सीखने की प्रक्रिया की शुरुआत है। उन्होंने अहमदाबाद से जुड़े अपने संस्मरण भी साझा किए।

जीयुटीएस के कुलपति प्रांजल मोदी ने सभी का स्वागत करते हुए डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। विश्वविद्यालय की गतिविधियों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में कुल 502 किडनी तथा 86 लीवर ट्रांसप्लांट किए गए हैं, जिनमें से 70 प्रतिशत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत किए गए। राज्य सरकार की सहायता से रोबोटिक सर्जरी निःशुल्क की गई है।

इस वर्ष कुल 104 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई है। इनमें यूरोलॉजी, एनेस्थीसियोलॉजी, फिजियोथेरपी, नर्सिंग, रीनल पैथोलॉजी, लीवर ट्रांसप्लांट एवं एब्डोमिनल ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन, डिप्लोमा इन लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी तथा डायलिसिस टेक्नोलॉजी के प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।

उपस्थित महानुभावों ने इस अवसर पर डॉ. एच. एल. त्रिवेदी की सेवाभावी विरासत को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

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