गांधीनगर , जनवरी 24 -- गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत की अध्यक्षता में शनिवार को लोकभवन, गांधीनगर में उत्तर प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा और असम राज्यों के स्थापना दिवस का उत्सव मनाया गया।
श्री देवव्रत ने इस अवसर पर सभी राज्यों के स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्रभाई मोदी की यह सोच है कि नेता शासक नहीं, बल्कि सेवक बनकर जनता के बीच रहें। इसी भावना के अनुरूप उन्होंने अंग्रेजों के समय से चले आ रहे ''राजभवन'' को ''लोकभवन'' में परिवर्तित किया है।
राज्यपाल ने इस अवसर पर प्रस्तुत विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि गुजरात में अध्ययनरत विद्यार्थियों और यहां निवास कर रहे नागरिकों द्वारा प्रस्तुत कला भारत की एकता का श्रेष्ठ उदाहरण है। उन्होंने भारतीय संस्कृति के मूल मूल्यों ''वसुधैव कुटुम्बकम्'' और ''सर्वे भवन्तु सुखिनः'' का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत सदैव संपूर्ण विश्व के कल्याण की प्रार्थना करने वाला देश रहा है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक सांस्कृतिक उत्सव ही नहीं, बल्कि यह एक सशक्त संदेश भी है कि एकता ही राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है।
उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत ने आधारभूत संरचनाओं में क्रांति की है। वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनें और रेलवे स्टेशनों का नवीनीकरण भारत की नयी पहचान बन गया है। पिछले आठ वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं, जो भारत के आर्थिक उत्थान का प्रमाण है।
राज्यपाल ने सभी से आह्वान किया कि हम राष्ट्र में निर्मित वस्तुओं का उपयोग करें और भारत के कौशल को विश्व पटल पर प्रस्तुत करें। उन्होंने ''आत्मनिर्भर भारत'' और ''विकसित भारत'' संकल्प को साकार करने हेतु सभी से सहयोग का आह्वान किया।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के शहरी विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा ने अपने संबोधन में गुजरात और उत्तर प्रदेश के बीच विकासात्मक संबंधों तथा प्रधानमंत्री के विजन पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के आरंभ में असम और मणिपुर राज्यों के राज्यपालों के वीडियो संदेशों का अवलोकन किया गया। विभिन्न राज्यों के संगठनों के प्रतिनिधियों द्वारा राज्यपालश्री का सम्मान किया गया। ''एक भारत श्रेष्ठ भारत'' की भावना को साकार करती मनमोहक प्रस्तुतियां भी प्रदर्शित की गईं।
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