, Feb. 23 -- ग्लोबल हरे कृष्ण मूवमेंट के सह-मार्गदर्शक तथा उपाध्यक्ष चंचलापति दास ने श्रील प्रभुपादजी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने 70 वर्ष की आयु में केवल 40 रुपये के साथ कारगो जहाज में अमेरिका जाकर हरे कृष्ण मंत्र को विश्वव्यापी बनाया। समुद्री यात्रा के दौरान दो बार हृदयाघात सहन करने के बावजूद वे गुरु की आज्ञा का पालन करने में दृढ़ रहे। उनके प्रयासों से ही विश्वभर में 108 से अधिक कृष्ण मंदिरों की स्थापना हुई है।
श्री दास ने इस अवसर पर अक्षयपात्र के सेवायज्ञ कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण तथा अक्षयपात्र फाउंडेशन के संयुक्त प्रयासों का स्मरण किया। प्रधानमंत्री ने गुजरात में वर्ष 2007 में मुख्यमंत्री के रूप में इस्कॉन को गुजरात में सेवा करने के लिए निमंत्रण दिया था और गांधीनगर में एक साधारण शेड में अक्षयपात्र के रसोई घर का उद्घाटन कर अपने करकमलों से बच्चों को भोजन परोसकर इस सेवायज्ञ का प्रारंभ कराया था।
श्री चंचलापति दास ने कहा कि आज अक्षयपात्र गुजरात के पांच स्थानों पर प्रतिदिन पांच लाख बच्चों को पौष्टिक भोजन प्रदान करता है। समग्र भारत में यह आंकड़ा 23.5 लाख बच्चों तक पहुंचा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस पुस्तक द्वारा गुजरात के नागरिक श्रील प्रभुपाद के संघर्षमय जीवन तथा भक्ति मार्ग के अधिक निकट आएंगे।
इस पुस्तक की लेखिका डॉ. उषाबेन उपाध्याय ने कहा कि श्रील प्रभुपाद का जीवन अप्रतिम साहस, धैर्य एवं मानव जाति के प्रति असीम करुणा का जीवंत उदाहरण है। श्रील प्रभुपाद ने 69 वर्ष की आयु में पश्चिम की भौतिकवादी संस्कृति में कृष्ण भक्ति के बीज रोपे थे। उन्होंने केवल धर्म का प्रचार ही नहीं किया, बल्कि व्यसनों में डूबे युवाओं को वैदिक संस्कारों के माध्यम से एक नैतिक समाज की रचना की थी। विश्वभर में 108 मंदिर की स्थापना तथा रूस या अफ्रीका जैसे विषम भौगोलिक एवं राजनीतिक क्षेत्रों में भी 'हरे कृष्ण' महामंत्र गुजायमान करना उनकी अकल्पनीय उपलब्धि है।
डॉ उपाध्याय ने कहा कि श्रील प्रभुपाद ने केवल आध्यात्मिक ज्ञान ही नहीं दिया, बल्कि अक्षयपात्र जैसी सेवा द्वारा भूखों को भोजन कराकर मानवता का सच्चा धर्म सिखाया है। आज जब भारत के प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर है, तब श्रील प्रभुपाद ने दशकों पूर्व ही एक 'आध्यात्मिक राजदूत' के रूप में भारत की सनातन संस्कृति को विश्वभर में विख्यात किया था।
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