गांधीनगर , दिसंबर 10 -- गुजरात में पिछले तीन वर्ष में पर्यावरण संरक्षण तथा हरितावरण बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिसमें वन क्षेत्र में कुल 1,04,270 हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई की गई है।
सूत्रों ने बुधवार को बताया कि केन्द्र सरकार की 'मिष्टी' योजना के क्रियान्वयन में भी गुजरात अग्रसर राज्य है। मैंग्रोव इनिशिएटिव फॉर शोरलाइन हैबिटेट एंड टेंजिबल इनकम (मिष्टी) योजना अंतर्गत समुद्र तट पर मैंग्रोव वन सृष्टि का विस्तार करते हुए कुल 34,242 हेक्टेयर क्षेत्र में मैंग्रोव की बुवाई की गई है।
यह योजना केन्द्र सरकार ने पांच जून, 2023 को तटवर्ती राज्यों में मैंग्रोव इकोसिस्टम को पुनर्जीवित करने के लिए शुरू की थी; जिसका मुख्य उद्देश्य मैंग्रोव बुवाई, मैंग्रोव क्षेत्र की वैज्ञानिक मैपिंग, नर्सरी विकास, हाइड्रोलॉजी-भौगोलिक स्थिति का मूल्यांकन, जन जागृति, प्रशिक्षण, अनुसंधान तथा इको-टूरिज्म को प्रोत्साहन देकर तटीय पर्यावरण का संरक्षण करना है।
राज्य सरकार ने परंपरागत घास-चारे की पुनर्स्थापना तथा वनाधारित जीवन को समर्थन देने के लिए उल्लेखनीय प्रयास किए हैं। पिछले तीन वर्ष में कच्छ के बन्नी क्षेत्र में कुल 5,000 हेक्टेयर में घास-चारे की बुवाई करके विभागीय घास-चारा संग्रह के अलावा अनुमानित 52.52 लाख किलोग्राम घास-चारे का स्थानीय लोगों को वितरण किया गया है। इसके अतिरिक्त; राज्य में पिछले तीन वर्ष में स्थानीय आदिवासी समुदायों को कुल 158 लाख बाँस का वितरण किया गया है।
वन विभाग द्वारा वन क्षेत्र में वनावरण बढ़ाने के लिए पिछले तीन वर्ष में कुल 1,04,270 हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई कार्य किया गया है, जबकि वन क्षेत्र से बाहर हरितावरण बढ़ाने के लिए सामाजिक वनीकरण योजना अंतर्गत इस दौरान कुल 10,213 हेक्टेयर क्षेत्र में विभागीय बुवाई कार्य किया गया है। इसके अलावा; राज्य के किसानों को वन विभाग की विभिन्न सहायता योजनाओं के तहत प्रोत्साहन दिया गया है, जिसके कारण किसानों द्वारा 1,09,425.60 हेक्टेयर क्षेत्र में पेड़-पौधे लगाए गए हैं।
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